नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की याचिका खारिज, जानिए क्या है पूरा मामला

बीएस राय। दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 23 साल पहले गुजरात में एक एनजीओ के प्रमुख रहे दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा दायर मानहानि के मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा, “दोषी ठहराए जाने की चुनौती खारिज कर दी गई है और दोषसिद्धि बरकरार है। सजा सुनाए जाने के लिए मेधा पाटकर 8 अप्रैल को पेश होंगी।”
सक्सेना ने 24 नवंबर, 2000 को जारी सक्सेना के खिलाफ मानहानिकारक प्रेस विज्ञप्ति के लिए पाटकर के खिलाफ राष्ट्रीय नागरिक स्वतंत्रता परिषद के अध्यक्ष के रूप में मामला दायर किया था।
पिछले साल 24 मई को एक मजिस्ट्रेट अदालत ने पाया था कि पाटकर द्वारा सक्सेना को “कायर” कहने और हवाला लेनदेन में उनकी संलिप्तता का आरोप लगाने वाले बयान न केवल अपने आप में मानहानिकारक थे, बल्कि उनके बारे में “नकारात्मक धारणाओं को भड़काने के लिए तैयार किए गए” थे।
अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता पर यह आरोप कि वह गुजरात के लोगों और उनके संसाधनों को विदेशी हितों के लिए “गिरवी” रख रही है, उसकी ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा पर सीधा हमला है।
सज़ा पर बहस 30 मई को पूरी हो गई थी, जिसके बाद 7 जून को सज़ा की मात्रा पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया गया था। 1 जुलाई, 2024 को अदालत ने उसे पाँच महीने के साधारण कारावास की सज़ा सुनाई, जिसके बाद पाटकर ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की।