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‘मेक इन इंडिया’ को रक्षा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट: रक्षा मंत्रालय ने निजी रक्षा उद्योगों के लिए सरकारी फायरिंग रेंज के उपयोग को दी आधिकारिक मंजूरी

सरिता त्रिपाठी | द इंडियन व्यू

नई दिल्ली: भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी फैसला लिया है। भारतीय रक्षा उद्योग, विशेषकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) द्वारा बनाए जा रहे स्वदेशी हथियारों और उपकरणों के परीक्षण के लिए रक्षा मंत्रालय ने अपनी ‘संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया’ (Revised SOP) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब निजी रक्षा कंपनियां सरकारी प्रूफ़ रेंज (Proof Ranges), फील्ड फायरिंग रेंज (Field Firing Ranges) और अन्य सैन्य परीक्षण सुविधाओं का उपयोग आसानी से कर सकेंगी।

अब तक, भारत में निजी रक्षा निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी बाधा हथियारों के परीक्षण और प्रमाणन (Testing & Certification) की रही है। भारी-भरकम पूंजी और भूमि की आवश्यकता के कारण कोई भी निजी कंपनी अपनी स्वयं की अत्याधुनिक फायरिंग रेंज या परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने में सक्षम नहीं थी। उन्हें अपने द्वारा विकसित किए गए ड्रोन, आर्टिलरी गन, छोटे हथियार (Small Arms) या गोला-बारूद का परीक्षण करने के लिए विदेशी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था या रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सेना की लंबी अनुमति प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे परियोजनाओं में भारी देरी होती थी। रक्षा मंत्रालय के इस फैसले ने इस सबसे बड़ी अड़चन को हमेशा के लिए दूर कर दिया है।

नई SOP के तहत पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और डिजिटल बना दिया गया है। अब निजी कंपनियां रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) के एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इन फायरिंग रेंजों को किराये पर बुक कर सकेंगी। परीक्षण के दौरान सेना और DRDO के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे, जो इन उपकरणों के तकनीकी मानकों और सुरक्षा मानदंडों का सटीक आकलन करेंगे। इससे न केवल परीक्षण की लागत कई गुना कम हो जाएगी, बल्कि स्वदेशी हथियारों के विकास और सेना में उनके शामिल होने (Induction) की प्रक्रिया में भी अभूतपूर्व तेजी आएगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए जा रहे ‘रक्षा औद्योगिक गलियारों’ (Defence Industrial Corridors) में निवेश को भी आकर्षित करेगा। जब निजी कंपनियों को विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाएं नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध होंगी, तो वे अनुसंधान और विकास (R&D) पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। भारत जो अब तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिना जाता था, अब तेजी से ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस फाइटर जेट और आर्टिलरी गन का निर्यात कर रहा है। सरकारी फायरिंग रेंजों को खोलने का यह निर्णय ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करते हुए भारत को एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्यातक (Global Defence Exporter) बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होने वाला है।