आपके कर्मों का फल तुरंत मिलता है, इंजरी रिप्लेसमेंट पर स्टोक्स पर अश्विन का तंज
भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर में चौथे टेस्ट के पहले दिन जब भारतीय बल्लेबाज ऋषभ पंत को चोट लगी थी तो भारतीय हेड कोच ने दलील दी थी कि इस तरह की चोट के लिए रिप्लेसमेंट मिलना चाहिए। इस पर बेन स्टोक्स ने कहा था कि ये मजाक और बेतुका है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

वहीं, जब आखिरी मैच में क्रिस वोक्स चोटिल हो गए तो फिर से ये डिबेट शुरू हो गई। चोट का खामियाजा इंग्लैंड ने भुगता। अब अश्विन ने स्टोक्स ने खिंचाई करते हुए कहा है कि कर्मों का फल आपको तुरंत मिलता है।
अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर भारत बनाम इंग्लैंड एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी की समीक्षा करते हुए इंजरी रिप्लेसमेंट के बारे में बात की।
उन्होंने कहा, “मैं इस सीरीज में एक और अपूर्णता के बारे में बात करना चाहता हूं। एक तमिल कहावत है जिसका मोटा-मोटा अनुवाद है, “आपके कर्म आपको लगभग तुरंत प्रभावित करेंगे।” आप जो बोएंगे, वही काटेंगे। आखिरी टेस्ट के बाद पंत की चोट के बारे में सवाल पूछे गए।
गौतम गंभीर ने कहा कि ऐसी चोटों के लिए रिप्लेसमेंट की जरूरत होती है और जब स्टोक्स से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे मजाक बताकर टाल दिया। मैं स्टोक्स की क्रिकेटिंग क्षमता और उनके रवैये का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं, लेकिन वह सोच-समझकर जवाब दे सकते हैं।”
अश्विन ने आगे क्रिस वोक्स के बारे में बात की और कहा, “क्रिस वोक्स अपने कंधे स्वेटर में दबाए मैदान में उतरे। और अपनी टीम को मैच जिताने के लिए जी-जान से जुट गए और लगभग जिताने के करीब भी पहुंच गए।
उन्हें खेल का पूरा ज्ञान था, इसलिए दौड़कर एटकिंसन को स्ट्राइक दी। क्रिस वोक्स को सैल्यूट है। कमाल का रवैया, और अपनी टीम के लिए आगे बढ़ने का एक अनोखा तरीका और अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी टीम के लिए लड़ना।”
अश्विन ने नियमों में बदलाव की जरूरत पर इंग्लैंड के कप्तान माइकल वॉन के एक बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “माइकल वॉन ने कहा था कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां खेल में बदलाव हो सकता है।
खिलाड़ियों के रिप्लेसमेंट की इजाजत होनी चाहिए। मैं बस इतना कह रहा हूं: दूसरी टीम के प्रति थोड़ी सहानुभूति दिखाइए। स्टोक्स को सोचना चाहिए था कि अगर ऋषभ पंत जैसी क्षमता वाला कोई खिलाड़ी उनकी टीम में होता और चोटिल हो जाता तो क्या होता।
क्या आप खिलाड़ियों को बदलना नहीं चाहेंगे? क्या यह उचित नहीं होगा? आप अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं – लेकिन ‘मजाक’ और ‘बेतुका’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना सम्मानजनक नहीं है। बोलने से पहले सोचिए। कर्म तुरंत फल देता है।”