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एशिया कप में फाइनल की राह आसान नहीं, जापान के खिलाफ होगी कड़ी टक्कर

पिछले मैच में चीन से मिली हार से आहत भारतीय महिला हॉकी टीम को अगर एशिया कप फाइनल में अपनी जगह पक्की करनी है, तो उसे शनिवार को जापान के खिलाफ खेले जाने वाले सुपर 4 के अहम मुकाबले में अपने मौकों को भुनाना ही होगा। भारत और जापान की पिछली भिड़ंत पूल चरण में 2-2 की बराबरी पर छूटी थी।

साभार : गूगल

अब फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को इस मैच में सिर्फ ड्रॉ की दरकार होगी। चीन पहले ही फाइनल में अपनी जगह बना चुका है। खिताबी मुकाबला रविवार को खेला जाएगा। सुपर 4 में चीन से 1-4 की हार भारत के लिए करारा झटका रही, खासकर तब जब टीम अब तक टूर्नामेंट में अजेय रही थी।

इस मैच में भारत ने कई अहम मौके गंवाए, जिनमें तीन पेनल्टी कॉर्नर भी हैं। खराब फिनिशिंग अब कोच हरेंद्र सिंह के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। स्कोरलाइन से भले ही ऐसा न लगे, लेकिन भारत ने चीन के खिलाफ मुकाबले में दमदार खेल दिखाया और लंबे समय तक गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा।

यह टीम के जुझारूपन का संकेत है। टीम की युवा स्ट्राइकर मुमताज खान बेहतरीन फॉर्म में हैं और उन्होंने कुछ शानदार मैदानी गोल किए हैं।

हालांकि उन्हें नवनीत कौर और अन्य अनुभवी खिलाड़ियों से ज्यादा सहयोग की दरकार होगी। साथ ही रुतुजा दादासो पिसल, लालरेमसियामी, उदिता, शर्मिला देवी और ब्यूटी डुंग डुंग को भी अब अपने प्रदर्शन में निरंतरता लानी होगी।

मध्य पंक्ति में नेहा गोयल और वैष्णवी विट्ठल फाल्के अहम भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उन्हें स्ट्राइकरों के लिए और ज्यादा मौके बनाने होंगे। वहीं कप्तान सलीमा टेटे से टीम को बेहतर नेतृत्व और प्रेरणा की जरूरत है, जो अब तक थोड़ी कमी महसूस हुई है।

भारत विश्व रैंकिंग में नौवें स्थान पर है और चीन के बाद एशिया कप की दूसरी सबसे ऊंची रैंकिंग वाली टीम है। इस टूर्नामेंट को जीतने वाली टीम अगले साल 15 से 30 अगस्त के बीच बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले हॉकी विश्व कप के लिए सीधे क्वालीफाई करेगी।

रैंकिंग और हालिया प्रदर्शन के आधार पर मेजबान चीन खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, लेकिन भारत के पास भी क्वालीफाई करने का शानदार मौका है—बस जरूरत है मौकों को भुनाने की और संयमित खेल दिखाने की।