पूजा रानी ने जीता विश्व मुक्केबाजी में पहला पदक, हार से मिली नई प्रेरणा
अनुभवी मुक्केबाज पूजा रानी ने तय कर लिया था कि यदि वे चौथी बार विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में पदक नहीं जीत पाईं, तो आगे प्रयास नहीं करेंगी। लेकिन भिवानी की 34 वर्षीय इस खिलाड़ी को लिवरपूल में 80 किलो वर्ग में पदक जीतने का मौका मिला।

टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाली पूजा ने एक समाचार एजेंसी से कहा, “इस बार भी मैंने खुद से कहा था कि अगर नहीं जीती तो आगे नहीं खेलूंगी।”
उन्होंने आगे बताया, “मैं हमेशा अपना 100% देती हूं, इसलिए हारने पर दिल टूट जाता है। मैंने पिछले चार-पांच महीनों से कड़ी मेहनत की थी और खुशी है कि मेरी मेहनत रंग लाई। मैं मार्च से राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के बाद से लगातार अभ्यास कर रही हूं।”
चार बार एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीत चुकी पूजा सेमीफाइनल में इंग्लैंड की एमिली एस्कीथ से हार गई, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। पूजा ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। यह मेरी चौथी विश्व चैम्पियनशिप थी और पहली बार मैं पदक जीत पाई हूं। यह मेरे लिए खास है।”
कुछ साल पहले कंधे की चोट और एक बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले हाथ जलने के कारण उनका करियर खतरे में था, लेकिन उन्होंने टोक्यो ओलंपिक से पहले वापसी की। उन्होंने 2019 और 2021 में एशियाई चैम्पियनशिप में पदक जीते, हालांकि टोक्यो में 75 किलो वर्ग के क्वार्टरफाइनल में हार गईं।
मई 2022 में पिता के निधन के बाद उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया लेकिन फिर ब्रेक भी लिया। 2023 की शुरुआत में उनका विवाह हुआ और एक साल बाद वे रिंग में लौटकर राष्ट्रीय खिताब जीत गईं।
ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन पहले ही पेरिस ओलंपिक के 75 किलो वर्ग में जगह बना चुकी थीं। पूजा ने पिछले एक साल में 75 किलो से 80 किलो वर्ग में प्रतिस्पर्धा की। अब उनकी नजरें 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर हैं। उन्होंने कहा, “मैं सोच रही हूं कि अब 70 किलो वर्ग में जाऊं।”