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इंडिया ए बनाम साउथ अफ्रीका ए : पंत की धमाकेदार वापसी, शतक से चूके पर फॉर्म में लौटे

इंडिया ए वर्सेस साउथ अफ्रीका ए पहला अनौपचारिक टेस्ट बेंगलुरु में हो रहा है। इंग्लैंड दौरे पर चोटिल होने के बाद टीम इंडिया के स्टार विकेट कीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इस मैच में वापसी कर रहे हैं।

पहले मैच में तो वह सस्ते में 17 के निजी स्कोर पर आउट हो गए, मगर दूसरे पारी में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की, हालांकि वह शतक से चूक गए। साउथ अफ्रीका ए से मिले टारगेट का पीछा करते हुए ऋषभ पंत 90 के निजी स्कोर पर आउट हुए। इस दौरान उन्होंने 11 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के लगाए।

पंत इस मैच में इंडिया ए की कप्तानी कर रहे हैं। अपने कल के 64 रन के स्कोर से आगे बढ़ाते हुए ऋषभ पंत अपने शतक की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन आखिरी दिन भारत ए के 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 113 गेंदों पर 90 रन बनाकर आउट हो गए। पंत ने अपनी पारी में 11 चौके और चार छक्के लगाए और तियान वैन वुरेन की गेंद पर आउट हो गए।

साभार : गूगल

पंत की यह पारी इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज से पहले उनका कॉन्फिडेंस बढ़ाएगी। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो मैच की टेस्ट सीरीज 14 नवंबर से शुरू होगी।

बता दें, ऋषभ पंत को इंग्लैंड में एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के दौरान पैर के अंगूठे में चोट लग गई थी। जुलाई के अंत में चौथे टेस्ट में रिवर्स शॉट खेलने की कोशिश में तेज गेंदबाज़ क्रिस वोक्स की एक गेंद उनके पैर पर लग गई थी। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें मैदान से बाहर ले जाना पड़ा और वे विकेटकीपिंग भी नहीं कर पाए।

इसके बावजूद, पंत अपने देश के लिए मैच बचाने के लिए प्लास्टर पहने हुए ही बल्लेबाजी के लिए वापस लौटे। पंत ने बीसीसीआई के एक वीडियो में अपनी इंजरी और रिकवरी को लेकर कहा, “यह मेरे लिए वाकई चुनौतीपूर्ण था। मुझे इंग्लैंड में फ्रैक्चर हुआ था और मुझे पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस प्रक्रिया का पहला चरण घाव भरने का था।

पहले छह हफ्तों तक, आपको फ्रैक्चर ठीक करना होता है और फिर आप सीओई के पास आते हैं। घाव जल्दी भर गया। मैंने अपना रिहैब धीरे-धीरे शुरू किया।

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शुरुआती दिनों में थोड़ा फिजियोथेरेपी करवाया। फिर धीरे-धीरे अपनी ताकत पर काम करने लगा और वहीं से दूसरा चरण शुरू हुआ। अभी मैं आपके साथ हूं, पूरी तरह से ठीक हो गया हूँ, इसके लिए सीओई का शुक्रिया। सकारात्मक रहना वास्तव में एक मानसिकता से जुड़ा मामला है। चोट लगने पर आप हतोत्साहित हो जाते हैं।

ऊर्जा का स्तर अच्छा नहीं होता, आप निराश होते हैं। लेकिन अगर आप छोटी-छोटी चीज़ें कर सकते हैं जिनसे आपको अच्छा महसूस होता है, तो आपको वो भी करना चाहिए। खासकर जब आप चोटिल हों।”