भारतीय हॉकी के 100 साल : गौरव, भावना और एकता का उत्सव
नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आज भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने का ऐतिहासिक जश्न सिर्फ़ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि देश की खेल भावना, एकता और गौरव का उत्सव बन गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, ओडिशा के खेल मंत्री सूर्यवंशी सूरज, और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष डाटो तैयब इकराम समेत देश-विदेश की कई हस्तियाँ मौजूद रहीं। डॉ. मांडविया ने कहा, “हॉकी सिर्फ़ एक खेल नहीं, यह भारत की पहचान है।
आज यह खेल फिर से विश्व पटल पर अपने सुनहरे युग की ओर लौट रहा है।” वहीं तैयब इकराम ने भारत की हॉकी यात्रा को “दुनिया के लिए प्रेरणा” बताया। कार्यक्रम की शुरुआत एक रोमांचक प्रदर्शनी मैच से हुई, जहाँ स्पोर्ट्स मिनिस्टर XI ने हॉकी इंडिया XI को 3–1 से हराया।

ब्यूटी डुंगडुंग, सलीमा टेटे और कृष्णा पाठक के गोलों ने दर्शकों में जोश भर दिया, जबकि मनप्रीत सिंह ने हॉकी इंडिया XI के लिए एकमात्र गोल दागा।
इस मौके पर भारतीय हॉकी के स्वर्ण युग के नायकों — गुर्बक्स सिंह, अजीत पाल सिंह, अशोक कुमार, जफर इकबाल, असुंता लाकड़ा और कई अन्य दिग्गजों — को सम्मानित किया गया।
जश्न का केंद्रबिंदु रहा “100 Years of Indian Hockey” पुस्तक का विमोचन और विशेष फोटो प्रदर्शनी, जिसने 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर टोक्यो तक की गाथा को तस्वीरों में सजीव कर दिया।
देशभर में एक साथ आयोजित हॉकी फेस्टिवल ने इस उत्सव को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया — 500 जिलों में 36,000 से अधिक खिलाड़ियों ने 1,000 से ज्यादा मैच खेले, मानो पूरा देश हॉकी की एक ही धुन पर थिरक उठा हो।
सौ साल की इस यात्रा ने साबित कर दिया कि हॉकी भारत के लिए सिर्फ़ “राष्ट्रीय खेल” नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का हिस्सा है — जो अतीत की यादों से लेकर भविष्य की उम्मीदों तक को जोड़ती है।