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जब द्रविड़ पर उठे सवाल, गांगुली ने लिया करियर बदलने वाला फैसला

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि द्रविड़ का वनडे करियर बचाने के लिए वह चयनकर्ताओं के खिलाफ चले गए थे। 2003 वर्ल्ड कप से पहले टीम का स्ट्रक्चर बदल रहा था। हालांकि, एक फैसला सौरव गांगुली ने लिया था, जिसकी वजह से राहुल द्रविड़ का वनडे करियर बचा था। राहुल द्रविड़ को मध्य क्रम में रखकर विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

सौरव गांगुली ने एक पॉडकास्ट में कहा, “एक समय था जब राहुल द्रविड़ को वनडे में चुना जा रहा था, लेकिन लोग कहते थे कि उनका स्ट्राइक रेट काफी अच्छा नहीं है। सिलेक्टर कहते थे कि शायद किसी और को चुना जाना चाहिए, लेकिन मैंने उन्हें नहीं छोड़ा, क्योंकि अगर मैंने उन्हें छोड़ दिया होता, तो उनका करियर खत्म हो सकता था।”

बात 2000 के दशक के शुरुआत की है, जब वाकई में राहुल द्रविड़ की वनडे टीम में जगह पर सवाल उठ रहे थे। उस समय तक राहुल द्रविड़ एक बड़ा नाम थे, लेकिन वनडे टीम में उनकी जगह नहीं बन रही थी। ऑस्ट्रेलिया के पास विकेटकीपर के रूप में एडम गिलक्रिस्ट जैसा खतरनाक बल्लेबाज था, जबकि साउथ अफ्रीका के पास मार्क बाउचर थे। श्रीलंका के पास कुमार संगकारा जैसा खब्बू बल्लेबाज था। भारत के पास ऐसा कोई विकेटकीपर नहीं था, जो तेज गति से या कंसिस्टेंसी से रन बनाए।

साभार : गूगल

सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट के सबसे जरूरी टैक्टिकल एक्सपेरिमेंट के पीछे की सच्चाई बताई और कहा, “हमारे पास ऐसा कोई विकेटकीपर नहीं था जो बैटिंग कर सके। श्रीलंका के पास संगकारा था, साउथ अफ्रीका के पास बाउचर था और ऑस्ट्रेलिया के पास गिलक्रिस्ट था।

हमारी बैटिंग छह पर खत्म होती थी। इसलिए हमने उन्हें विकेटकीपर बनाया।” यह एक ऐसा फैसला था, जिससे न सिर्फ टीम को मजबूती मिली, बल्कि निचले क्रम तक बल्लेबाजी भी बढ़ गई, क्योंकि सात पर मोहम्मद कैफ को खिलाया जा सका था।

विकेटकीपर की ही समस्या उस समय टीम में नहीं थी, बल्कि गांगुली ने माना है कि ऑलराउंड ऑप्शन भी अच्छे नहीं थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास उस तरह का ऑलराउंडर नहीं था। इसलिए सहवाग ने बॉलिंग की, सचिन ने बॉलिंग की, मैंने बॉलिंग की, युवराज ने बॉलिंग की।

अच्छी टीमों के पास ऐसे ऑलराउंडर थे; हमारे पास नहीं थे।” द्रविड़ ने काफी समय तक विकेटकीपर की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन एक बार जब एमएस धोनी की एंट्री हुई तो सारे ऑप्शन फीके पड़ गए और वे डेढ़ दशक तक विकेट के पीछे रहे।