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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने “अरुणाचल कीवी

अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी" मिशन किया लॉन्च

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने “अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी – अरुणाचल प्रदेश राज्य के लिए क्लस्टर-आधारित कीवी खेती और मूल्य श्रृंखला विकास मिशन” की शुरुआत की है । इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव मनीष कुमार गुप्ता और सचिव, एमडीओएनईआर संजय जाजू उपस्थित थे।

लगभग ₹167 करोड़ के खर्च के साथ, ‘अरुणाचल कीवी पर मिशन: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ को एक ‘समग्र-सरकारी’, तालमेल-आधारित दृष्टिकोण के जरिए तैयार किया गया है। इस मिशन की अगुवाई एमडीओएनईआर कर रहा है और इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाओं के साथ-साथ नाबार्ड, आईसीएआर-सीआईटीएच, एपीडा, एनईआरएएमएसी और समर्पित निजी निवेशकों के साथ मिलकर बुना गया है।

इस मिशन को मूल्य श्रृंखला में शामिल हर हिस्सेदार के नजरिए को ध्यान में रखते हुए आकार दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसमें किए गए उपाय जमीनी हकीकतों और अरुणाचल के कीवी-खेती करने वाले समुदायों की आकांक्षाओं को सही मायने में दर्शाते हों।

यह मिशन एक क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसके तहत जीरो वैली (लोअर सुबनसिरी), दिरांग और कलाकतांग (वेस्ट कामेंग), शि योमी, और दिबांग घाटी में छह एकीकृत क्लस्टर-स्तरीय ‘फसल-बाद प्रबंधन हब’ (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट हब्स) की पहचान की गई है। इस मिशन के तहत 30 से अधिक रणनीतिक पहलें कीवी की पूरी मूल्य श्रृंखला में मौजूद गंभीर कमियों को दूर करने का प्रयास करती हैं, जिनमें कीमतों में मिलने वाले अंतर को पाटना, अरुणाचल के समाप्त हो चुके एनपीओपी जैविक प्रमाणन को फिर से हासिल करना, 7-10 दिनों की ‘बाध्यकारी बिक्री’ की अवधि को समाप्त करने के लिए कोल्ड-चेन एवं फसल-बाद के बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और हजारों किसान परिवारों को वृक्षारोपण विकास, फसल-बाद प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पता लगाने की क्षमता, निर्यात और अनुभवात्मक कृषि-पर्यटन के एक एकीकृत तंत्र से जोड़ना शामिल हैं।