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पश्चिम एशिया में शांति की बड़ी उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के संघर्ष विराम विस्तार पर बनी ऐतिहासिक सहमति

वर्षों से युद्ध के मुहाने पर खड़े पश्चिम एशिया (West Asia) के लिए आज का दिन एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। ओमान और कतर की लंबी कूटनीतिक मध्यस्थता के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए 60 दिनों के संघर्ष विराम (Ceasefire) विस्तार पर एक ऐतिहासिक सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस पहल को वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है, और अब केवल उनके अंतिम हस्ताक्षरों (Signature) का इंतजार है। इस समझौते से दुनिया भर के बाजारों और कच्चे तेल की आपूर्ति को एक बड़ी स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

तनाव के दौर में कूटनीति की जीत
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक मोर्चे पर अभूतपूर्व तल्खी देखी गई थी। सीरिया, लेबनान और यमन के विद्रोही गुटों को लेकर दोनों देश आमने-सामने थे। वैश्विक आर्थिक गलियारों में यह डर बैठ गया था कि यदि दोनों परमाणु शक्तियों के बीच सीधा टकराव होता है, तो पूरी दुनिया एक भयानक आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएगी। ऐसे समय में, दोनों पक्षों का टेबल पर आना और 60 दिनों के लिए युद्ध जैसी गतिविधियों को रोकने पर सहमत होना वैश्विक राजनय (Global Diplomacy) की एक बहुत बड़ी जीत माना जा रहा है।

‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा
इस अस्थाई शांति समझौते का सबसे बड़ा और तत्काल लाभ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को मिलेगा।

यह जलमार्ग पूरी दुनिया के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति की जीवन रेखा है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। पिछले दिनों ईरान द्वारा तेल टैंकरों को रोकने और अमेरिका द्वारा वहां अतिरिक्त नौसैनिक बेड़े तैनात करने से इस क्षेत्र में जहाजों का आवागमन अत्यंत जोखिम भरा हो गया था। नए समझौते के तहत, अगले 60 दिनों तक ईरान इस जलमार्ग में किसी भी व्यापारिक जहाज को निशाना नहीं बनाएगा, और बदले में अमेरिका अपने कुछ आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) को अस्थाई रूप से शिथिल रखेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप के अंतिम हस्ताक्षर का इंतजार
वाशिंगटन से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते के मसौदे (Draft) को दोनों देशों के राजनयिकों ने अंतिम रूप दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने का वादा किया था, वो इस सौदे को अपनी एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रहे हैं।

व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि आगामी 48 घंटों के भीतर राष्ट्रपति इस दस्तावेज़ पर अपने आधिकारिक हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी संसद (Congress) के कुछ कट्टरपंथी सदस्य इस समझौते का विरोध भी कर रहे हैं; उनका तर्क है कि ईरान पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता और वह इस 60 दिनों के समय का उपयोग अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में कर सकता है।

वैश्विक बाजारों को मिली संजीवनी
इस खबर के सार्वजनिक होते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जो 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रही थीं, उनमें अचानक 4 से 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) ने भी इस खबर का स्वागत रिकॉर्ड बढ़त के साथ किया है। यदि यह 60 दिनों का संघर्ष विराम शांतिपूर्वक बीत जाता है, तो भविष्य में एक स्थाई और दीर्घकालिक शांति समझौते (Permanent Peace Treaty) का रास्ता साफ हो सकता है, जो पूरी मानवता के हित में होगा।