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नागालैंड में ‘साइलेंट किलर’ पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी

तंबाकू और निकोटीन पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए सरकार ने कसा शिकंजा, स्वास्थ्य मंत्री ने दिया कड़ा संदेश

कोहिमा/विवेक ओझा | पूर्वोत्तर भारत की हरी-भरी वादियों के बीच एक ऐसा ‘साइलेंट किलर’ दशकों से अपनी जड़ें जमाए बैठा है, जो हर साल हज़ारों जिंदगियों को खामोशी से निगल रहा है—तंबाकू। लेकिन अब नागालैंड सरकार ने इस खामोश मौत के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध का शंखनाद कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने एक कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए सभी सरकारी विभागों से अपील की है कि वे राज्य में तंबाकू और निकोटीन उत्पादों पर सख्त प्रतिबंध लागू करने के लिए तत्काल और समन्वित कदम उठाएं। यह महज़ कागजी आदेश नहीं है, बल्कि राज्य की युवा पीढ़ी को इस लत के दलदल से बाहर निकालने का एक मास्टरस्ट्रोक है।

खतरे की घंटी: क्यों ज़रूरी था यह कदम?
पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर नागालैंड में तंबाकू और गुटखे का सेवन एक सामाजिक स्वीकार्यता पा चुका है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS) के आंकड़े लंबे समय से इस बात की गवाही देते रहे हैं कि राज्य की एक बड़ी आबादी कैंसर और हृदय रोगों के मुहाने पर खड़ी है। लेकिन अब जो चीज़ सबसे ज्यादा डरा रही है, वह है स्कूली बच्चों के बीच ई-सिगरेट (Vapes) और नए निकोटीन उत्पादों की बढ़ती पैठ। स्वास्थ्य मंत्री का ताज़ा निर्देश सीधे तौर पर इस ‘सप्लाई चेन’ को काटने की रणनीति है।

समन्वित कार्रवाई (Coordinated Action) का ब्लूप्रिंट
नागालैंड सरकार यह समझ चुकी है कि सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के नोटिस जारी करने से यह जंग नहीं जीती जा सकती। जब तक पुलिस, शिक्षा विभाग, नगर निगम और कर (Tax) विभाग एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक तंबाकू माफिया इस प्रतिबंध को धता बताते रहेंगे।

नई रणनीति के तहत स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बेचने वालों पर अब सिर्फ मामूली जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि उनके लाइसेंस रद्द करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, सीमा पार से आने वाले अवैध ई-सिगरेट और विदेशी सिगरेट की तस्करी रोकने के लिए पुलिस और इंटेलिजेंस को हाई-अलर्ट पर रखा गया है।

नीति बनाना आसान है, लेकिन उसे ज़मीन पर उतारना लोहे के चने चबाने जैसा है। नागालैंड सरकार का यह कदम नीयत के स्तर पर शानदार है, लेकिन असली चुनौती प्रवर्तन (Enforcement) की है। अगर नागालैंड प्रशासन अपने इस कड़े फैसले को 100 प्रतिशत लागू कर ले जाता है, तो यह पूरे भारत के लिए तंबाकू नियंत्रण का एक ‘रोल मॉडल’ बन सकता है।