राम मंदिर दान राशि चोरी कांड के बाद बड़ा एक्शन: ट्रस्ट कार्यालय में लगा अत्याधुनिक हाई-सिक्योरिटी लॉकर

अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की चोरी का सनसनीखेज प्रकरण सामने आने के बाद ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ एक्शन मोड में आ गया है। रामलला के दरबार में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए ट्रस्ट ने अपनी पूरी लेखा-प्रबंधन (Accounting) और सुरक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पुराने और ढीले सिस्टम को हटाकर एक नई, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जा रही है। राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में अब एक नया और अत्याधुनिक ‘उच्च सुरक्षा वाला लॉकर’ (High-Security Locker) स्थापित कर दिया गया है।
महासचिव चंपत राय की देखरेख में लगा नया लॉकर, अब सामान छिपाना या चुराना नामुमकिन
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दान राशि चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने खुद सुरक्षा और ऑडिट से जुड़ी व्यवस्थाओं की मैराथन समीक्षा की। चंपत राय ने अपनी सीधी देखरेख में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार कराया गया अत्याधुनिक लॉकर सिस्टम ट्रस्ट कार्यालय में फिट करवाया है।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दानपेटियों (Hundi) से निकलने वाली भारी-भरकम नकदी, देश-विदेश से आने वाले बहुमूल्य सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य मूल्यवान उपहारों को पूरी तरह सुरक्षित रखना है। अब दानपेटियों को खोलने से लेकर, रकम की गिनती करने, उसका दस्तावेजीकरण (Documentation) करने और उसे बैंक में सुरक्षित जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया की कमान बेहद सख्त और जवाबदेह अधिकारियों के हाथों में सौंप दी गई है। पूरी प्रक्रिया की 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों के जरिए डिजिटल निगरानी की जाएगी ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चोरी की गुंजाइश को ‘जीरो’ किया जा सके।
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र बोले- ‘SIT की जांच पर पूरा भरोसा, 15 दिन में आएगी फाइनल रिपोर्ट’
इस पूरे मामले पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी बड़ा बयान दिया है। अयोध्या के सर्किट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की जमकर सराहना की। नृपेंद्र मिश्र ने कहा:
राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले को बेहद गंभीरता से लिया और घटना के सामने आने के 24 घंटे से भी कम समय में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया, जो सराहनीय है।”
उन्होंने एसआईटी की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा जताते हुए बताया कि इस विशेष जांच दल में उत्तर प्रदेश के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
सीबीआई के पूर्व एक्सपर्ट और वित्त विशेषज्ञ कर रहे हैं जांच
नृपेंद्र मिश्र ने एसआईटी के ढांचे का खुलासा करते हुए बताया कि इस जांच टीम में:
एक मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) स्तर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी।
एक आईजी (Inspector General) स्तर के आईपीएस अधिकारी, जिन्हें सीबीआई (CBI) में कई वर्षों तक वित्तीय और जघन्य अपराधों की जांच करने का लंबा अनुभव है।
वित्त विभाग (Finance Department) के विशेषज्ञ अधिकारी शामिल हैं, जो बारीकी से खातों और ऑडिट की स्क्रूटनी कर रहे हैं।
सरकार ने एसआईटी को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं कि वह 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट शासन को सौंपे। नृपेंद्र मिश्र ने साफ कहा कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट में सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर जो भी संस्तुतियां (सिफारिशें) देगी, ट्रस्ट उन्हें अक्षरशः लागू करेगा। व्यवस्था में जहां भी कोई लूपहोल या कमी पाई जाएगी, उसे हमेशा के लिए दूर कर दिया जाएगा।