फीफा वर्ल्ड कप में छाए भारतीय मूल के सरप्रीत सिंह, न्यूजीलैंड के लिए रच दिया इतिहास
फीफा वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड से खेल रहे सरप्रीत सिंह सुर्खियों में छा गए हैं। वह फुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े मंच के मौजूदा संस्करण में खेलने वाले भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। 16 जून को इरान के खिलाफ न्यूजीलैंड ने उन्हें अपनी शुरुआती इलेवन में शामिल किया था।
मिडफील्ड पॉजीशन पर उन्होंने 90 मिनट तक मैदान पर पसीना बहाया लेकिन दूसरे के बाद एक्सट्रा टाइम में उन्हें रणनीति के चलते स्ट्राइकर जेसी रैंडल से सब्सटीट्यूट कर दिया गया।
20 फरवरी 1999 को ऑकलैंड में जन्में सरप्रीत सिंह का ताल्लुक पंजाब के जलंधर से है। उनके माता-पिता भारत से न्यूजीलैंड गए थे। उनका परिवार ऑकलैंड में किराने की दुकान चलाता है। सरप्रीत को बचपन से फुटबॉल देखने और खेलने का शौक था।

सिर्फ 7 साल की उम्र में वे ऑकलैंड में ‘विन्स विंटन रूफर सॉकर अकादमी’ में शामिल हुए और बाद में 2015 में ‘वेलिंगटन फीनिक्स अकादमी’चले गए। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के लिए अंडर-17 ओशिनिया कप और अंडर-20 वर्ल्ड कप में प्रतिनिधित्व किया। 2020 में, सरप्रीत ने एफसी नूर्नबर्ग के साथ एक सीजन के लिए लोन डील साइन की थी। अब फीफा वर्ल्ड कप का हिस्सा बनकर उन्होंने इतिहास रचा।
सरप्रीत सिंह से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा ये भी है कि 2018 में इंटर कॉन्टिनेंटल कप में वे भारत के खिलाफ मैदान पर उतरे थे। न्यूजलैंड की 2-1 से जीत में उन्होंने दोनों गोल में असिस्ट कर खास भूमिका निभाई थी। मैच के बाद उन्होंने बयान देते हुए कहा कि ‘सिंह’ होने के नाते भारत के खिलाफ खेलना एक अलग अनुभव है।
अंत में बात की जाए मैच की तो ईरान बनाम न्यूजीलैंड मुकाबला 2-2 की स्कोर लाइन के साथ ड्रॉ रहा। न्यूजीलैंड के एलिजाह जस्ट ने 7वें मिनट में पहला गोल किया था। फिर 32वें मिनट में रामिन रेज़ाइयान की ओर से पलटवार किया गया। एलिजाह ने दोबारा न्यूजीलैंड की वापसी करवाते हुए 55वें मिनट में गोल दाग दिया। अंत में मोहम्मद मोहेबी ने 64वें मिनट में स्कोर को बराबर कर दिया।