आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज कांड में सीबीआई का बड़ा एक्शन
पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष से लंबी पूछताछ, जांच के घेरे में 'प्रभावशाली' नेटवर्क

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (R.G. Kar Medical College and Hospital) में हुए जघन्य बलात्कार और हत्याकांड के मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। इस पूरे कांड के पीछे छिपे ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ और सबूतों को मिटाने वाले प्रभावशाली नेटवर्क (Nexus) को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई को और अधिक आक्रामक बना दिया है। इसी कड़ी में आज सीबीआई की विशेष जांच टीम ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक निर्मल घोष को समन जारी कर साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स (CGO Complex) में तलब किया और उनसे कई घंटों तक बेहद कड़ी व लंबी पूछताछ की।
सीबीआई की इस ताजा और बड़ी कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और चिकित्सा प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर हड़कंप मचा दिया है। यह पूछताछ साफ इशारा करती है कि इस जघन्य अपराध के तार केवल अस्पताल प्रशासन तक सीमित नहीं थे, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था।
पूछताछ के मुख्य बिंदु: आखिर क्यों रडार पर आए टीएमसी नेता?
सीबीआई के आधिकारिक और अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष से पूछताछ मुख्य रूप से तीन गंभीर और संवेदनशील बिंदुओं पर केंद्रित थी:
* शवदाह में जल्दबाजी और दबाव के आरोप: घटना के ठीक बाद पीड़िता के शव का पोस्टमार्टम और उसके तुरंत बाद अंतिम संस्कार (शवदाह) जिस अभूतपूर्व जल्दबाजी में किया गया, उसे लेकर शुरुआत से ही उंगलियां उठती रही हैं। सीबीआई को ऐसे पुख्ता इनपुट और कॉल रिकॉर्ड्स मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि स्थानीय प्रभावशाली नेताओं ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को तेज करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर अनुचित दबाव बनाया था।
* अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से संबंध: सीबीआई इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आर.जी. कर अस्पताल के विवादित और मुख्य आरोपी पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के साथ निर्मल घोष के किस तरह के प्रशासनिक और व्यक्तिगत संबंध थे। जांच एजेंसी को संदेह है कि संदीप घोष द्वारा अस्पताल में चलाए जा रहे वित्तीय घोटालों और सुरक्षा में चूक के सिंडिकेट को स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व का पूरा वरदहस्त प्राप्त था।
* घटनास्थल (Crime Scene) से छेड़छाड़ की कड़ियां: पीड़िता के साथ हुए अपराध के तुरंत बाद जिस तरह से अस्पताल के उस सेमिनार रूम और उसके आसपास के हिस्से में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ की कोशिश की गई थी, उसका मकसद सबूतों को नष्ट करना था। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ‘डैमेज कंट्रोल’ और सबूत मिटाने की साजिश के पीछे किन-किन बाहरी चेहरों का दिमाग काम कर रहा था।
संस्थागत नेक्सस और सबूतों को दफन करने की साजिश
आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज का यह पूरा मामला केवल एक सुरक्षा चूक या एक अपराधी की दरिंदगी की कहानी नहीं है। यह असल में इस बात का सबसे खौफनाक उदाहरण है कि कैसे एक सरकारी संस्थान के भीतर भ्रष्टाचार, जबरन वसूली (Extortion), और मेडिकल माफिया का एक ऐसा कॉकटेल तैयार हो चुका था, जिसने एक युवा डॉक्टर की जान ले ली।
जब इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी गई, तभी से यह स्पष्ट था कि जब तक इस मामले की ‘पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव लेयर्स’ (राजनीतिक और प्रशासनिक परतें) नहीं खोली जाएंगी, तब तक पीड़िता को न्याय मिलना असंभव है। पूर्व विधायक निर्मल घोष से आज की यह लंबी पूछताछ इसी नेक्सस को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक प्रहार है।
न्याय की उम्मीद और भविष्य की रूपरेखा
सीबीआई द्वारा आज की गई इस सघन पूछताछ से यह साफ हो गया है कि जांच एजेंसी अब किसी भी ‘रसूखदार’ चेहरे को बख्शने के मूड में नहीं है, चाहे उसका राजनीतिक कद कितना भी बड़ा क्यों न हो। निर्मल घोष के बयान दर्ज होने के बाद जांच टीम उनके दावों का मिलान तकनीकी सबूतों और अन्य गवाहों के बयानों से करेगी।
देश भर के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और आम जनता की नजरें इस समय सीबीआई की चार्जशीट और उसकी कोर्ट प्रोग्रेस पर टिकी हैं। आज का यह एक्शन यह साबित करता है कि न्याय की चक्की भले ही धीमी चलती है, लेकिन जब उसके पाट घूमते हैं, तो बड़े से बड़े प्रभावशाली चेहरे भी उसकी जद में आने से खुद को बचा नहीं पाते। आर.जी. कर कांड के असली गुनहगारों और उनके संरक्षकों को बेनकाब करने के लिए इस कानूनी जंग का तार्किक अंजाम तक पहुंचना बेहद जरूरी है।