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26 जून को हर साल मनाते हैं अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस

नई दिल्ली ( विवेक ओझा) : मादक पदार्थों की लत या नशाखोरी के वैश्विक संकट के प्रति दुनिया भर के देशों को जागरूक करने, एकजुट करने और इस खतरे से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के उद्देश्य से हर साल 26 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध तस्करी विरोधी दिवस’ (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी यह दिवस दुनिया भर में एक नए संकल्प, नई ऊर्जा और नई रणनीतियों के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष का मूल मंत्र और हमारा परम लक्ष्य है “स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य का संकल्प”।

यह नारा केवल एक औपचारिक वक्तव्य नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के हर नागरिक, विशेषकर युवा पीढ़ी को नर्क की इस दलदल से बाहर निकालने और एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और सुरक्षित विश्व की स्थापना करने का एक वैश्विक आह्वान है। जब तक हमारा जीवन स्वस्थ नहीं होगा, तब तक हम एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते।

अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस का इतिहास और पृष्ठभूमि :

26 जून की तारीख का चयन अचानक नहीं किया गया था, बल्कि इसका एक गहरा ऐतिहासिक संदर्भ है। चीन में किंग राजवंश (Qing Dynasty) के दौरान, एक महान चीनी अधिकारी और देशभक्त लिन ज़ेशू (Lin Zexu) ने अफीम युद्ध से ठीक पहले, 25 जून 1839 को (Humen, Guangdong) में बड़े पैमाने पर अफीम के अवैध व्यापार को नष्ट करने की मुहिम पूरी की थी। उन्होंने ब्रिटिश तस्करों से जब्त की गई अफीम को नष्ट करवा कर अवैध ड्रग्स के खिलाफ दुनिया का पहला बड़ा संदेश दिया था। इसी ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने और वैश्विक स्तर पर नशे के खिलाफ अलख जगाने के लिए 26 जून का दिन चुना गया।

मादक पदार्थों का वर्गीकरण:

मादक पदार्थ वे रासायनिक तत्व होते हैं, जो किसी जीव के शरीर में प्रवेश करने पर उसके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बदल देते हैं। ये पदार्थ व्यक्ति की चेतना, मूड, व्यवहार और सोचने-समझने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। वैज्ञानिक और चिकित्सा की दृष्टि से इन मादक पदार्थों को मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। उत्तेजक (Stimulants): ऐसे पदार्थ हैं जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को अत्यधिक तेज कर देते हैं। इनके सेवन से व्यक्ति को अस्थायी रूप से अत्यधिक ऊर्जा, उत्साह और जागरूकता का अनुभव होता है, लेकिन इसके बाद अक्सर थकान, अवसाद और मानसिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस श्रेणी में कोकीन, एम्फ़ैटेमिन, निकोटीन, कैफीन तथा मेथामफेटामाइन (क्रिस्टल मेथ) प्रमुख हैं। शामक या अवसादक (Depressants): केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गति को धीमा कर देते हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति को सुस्ती, शिथिलता, भ्रम तथा प्रतिक्रिया क्षमता में कमी का अनुभव होता है। अल्कोहल (शराब), बार्बिट्यूरेट्स और बेंजोडायजेपाइन इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ओपियोइड्स (Opioids): अत्यंत प्रभावशाली दर्द निवारक पदार्थ होते हैं, लेकिन इनमें लत लगने की संभावना बहुत अधिक होती है। ये सीधे मस्तिष्क के उन रिसेप्टर्स पर कार्य करते हैं जो दर्द और आनंद की अनुभूति को नियंत्रित करते हैं। अफीम, हेरोइन, मॉर्फिन, कोडीन और सिंथेटिक फेंटानिल इस श्रेणी के प्रमुख उदाहरण हैं।

मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उनकी अवैध तस्करी के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय मंच तैयार करने की आवश्यकता बीती शताब्दी के उत्तरार्ध में तीव्रता से महसूस की जाने लगी थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा का ऐतिहासिक निर्णय: 7 दिसंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने प्रस्ताव संख्या 42/112 पारित किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से यह तय किया गया कि प्रतिवर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध तस्करी विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों से मुक्त एक अंतरराष्ट्रीय समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करना था।