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अल-नीनो संकट के बीच भारत में सूखा प्रभावित इलाकों में 41 करोड़ बच्चों पर नया संकट : यूनिसेफ

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह) : अल-नीनो की वजह से भारत के कई सूखा प्रभावित इलाकों में नया संकट गहरा गया है. यूनिसेफ के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले करीब 41 करोड़ बच्चों पर कुपोषण, स्वास्थ्य समस्याओं और परिवारों की आजीविका छिनने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

यह स्थिति सिर्फ मौसम की मार नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक घटनाओं का मिला हुए प्रभाव है, जो बच्चों के विकास को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है।

अल-नीनो की घटना यानी प्रशांत महासागर के इक्वेटर लाइन के आसपास समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि से जुड़ी होती है. सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी प्रशांत (पेरू-इक्वाडोर तट) में ठंडा पानी ऊपर आता है, लेकिन अल-नीनो के दौरान ट्रेड विंड्स कमजोर हो जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं. इससे गर्म पानी पश्चिम से पूर्व की ओर फैल जाता है।

यह परिवर्तन दुनिया भर में वायुमंडलीय सर्कुलेशन को प्रभावित करता है. वॉकर सर्कुलेशन कमजोर पड़ जाता है, जिससे भारत सहित दक्षिण एशिया में मॉनसूनी बारिश घट जाती है. वैज्ञानिक रूप से यह ENSO (El Nino-Southern Oscillation) का गर्म चरण है, जो 2 से 7 साल में एक बार होता है। भारत में अल-नीनो अक्सर कमजोर या देरी से आने वाले मॉनसून, कम बारिश और सूखे का कारण बनता है. इस बार की स्थिति में अल-नीनो की तीव्रता ने सूखे को और बढ़ा दिया है, जिससे कृषि, जल स्रोत और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

भारत में सूखे की स्थिति और UNICEF रिपोर्ट

भारत में 41.16 करोड़ बच्चे कम से कम दो जलवायु या आपदा संबंधी खतरों के संपर्क में हैं. इनमें से 97% बच्चे सूखा और अत्यधिक गर्मी के संयुक्त खतरे का सामना कर रहे हैं. सूखा प्रभावित क्षेत्रों में 15.88 करोड़ से ज्यादा बच्चे कुपोषण के ज्यादा जोखिम में हैं। कृषि और मौसम संबंधी सूखा से 41 करोड़ से अधिक बच्चे प्रभावित हैं।

सूखे की वजह से फसलें सूख रही हैं. पानी के स्रोत सूख रहे हैं। पशुपालन प्रभावित हो रहा है. इससे परिवारों की आय घट रही है। खाद्यान्न की कमी हो रही है। बच्चों का पोषण स्तर गिर रहा है। सूखा प्रभावित राज्यों में बच्चे कुपोषण, डायरिया, सांस संबंधी बीमारियों और विकास संबंधी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं।