राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड : टिन्नू यादव का नाम लेते ही मिल जाती थी चेकिंग से छूट, SIT के सामने बैंक कैशियर का बड़ा खुलासा

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पूर्व में गणना कार्य में शामिल रहे बैंक के एक कैशियर ने बेहद सनसनीखेज बयान दिया है। कैशियर के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था में भारी सेंधमारी के पीछे एक रसूखदार नाम ‘टिन्नू यादव’ का था, जिसका नाम लेते ही सुरक्षाकर्मी चेकिंग करना बंद कर देते थे।
‘टिन्नू यादव’ के नाम का चलता था सिक्का
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को दिए बयान में कैशियर ने बताया कि मंदिर परिसर में मुख्य रूप से चार लोगों का दबदबा था। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और व्यवस्थापक गोपाल राव के अलावा यदि परिसर में किसी की हनक थी, तो वह टिन्नू यादव था। टिन्नू के पास हमेशा वॉकी-टॉकी रहता था और उसका नाम लेने मात्र से कोई भी सुरक्षाकर्मी किसी को रोकता नहीं था। टिन्नू यादव के नाम की आड़ में सुरक्षा जांच के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
शुरुआत में सख्त थी जांच, बाद में बदली व्यवस्था
कैशियर ने बताया कि शुरुआत में सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद थी। एसआईएस (SIS) के सुरक्षाकर्मी गणना कर्मियों की विधिवत जांच करते थे और उन्हें काउंटिंग रूम में जाने से पहले विशेष ड्रेस पहनाई जाती थी। लेकिन बाद में एक सोची-समझी साजिश के तहत किसी रसूखदार के कहने पर इस पूरी व्यवस्था को बदल दिया गया और चेकिंग में ढील दी जाने लगी।
अभ्यस्त अपराधियों की तरह व्यवहार करते थे आरोपी
चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले गणना कर्मी किसी शातिर अपराधी की तरह काम करते थे। गोपनीय कक्ष में नोटों की गिनती के दौरान वे एक-दूसरे से न तो बात करते थे और न ही नजरें मिलाते थे। वे जानबूझकर शांत रहते थे ताकि किसी को उनके बीच घनिष्ठता का शक न हो। सब कुछ पहले से तय स्क्रिप्ट के अनुसार होता था— कैसे दानपात्रों से नकदी चुरानी है, उसे बाथरूम या अन्य ठिकानों पर कैसे छिपाना है और फिर सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचाकर बाहर कैसे ले जाना है।
बड़ी रकम साफ होने पर होती थी ‘पार्टी’
कैशियर के मुताबिक, जब ये आरोपी चढ़ावे से कोई बड़ी रकम पार करने में कामयाब हो जाते थे, तब जमकर मौज-मस्ती और गुप्त पार्टियां की जाती थीं। अन्यथा, आम दिनों में ये काउंटिंग रूम में बिल्कुल अजनबी होने का नाटक करते थे।
10 कैमरों और सख्त सुरक्षा के बीच होती थी चोरी
हैरानी की बात यह है कि यह पूरी चोरी $10 \times 15$ फीट के एक छोटे से गणना कक्ष में होती थी, जहां 10 सीसीटीवी (CC) कैमरे लगे हुए थे। मुख्य गेट पर पुलिस की तलाशी, हुंडी कार्यालय में दोबारा जांच, मोबाइल व निजी सामान लॉकर में जमा कराना और विशेष ड्रेस पहनना अनिवार्य होने के बावजूद आरोपियों ने चोरी का यह नेटवर्क खड़ा कर लिया। ट्रस्ट और बैंक कर्मियों की मौजूदगी में नोटों की शॉर्टिंग, गिनती और बंडलिंग होती थी, जिसके बाद रकम को रजिस्टर में दर्ज कर लोहे के कंटेनर में बैंक भेजा जाता था, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा में सेंध लगाकर बड़ी रकम चुरा ली जाती थी।
SIT अब इस बयान के आधार पर टिन्नू यादव और सुरक्षा व्यवस्था में ढील देने वाले अन्य संदिग्धों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।