बालोगुन का बैन हटते ही मचा बवाल, फीफा की निष्पक्षता पर उठे सवाल
फीफा विश्व कप के बीच अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का एक मैच का बैन हटाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. इस फैसले के बाद फीफा की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो के बीच हुई बातचीत के बाद बालोगुन को अपील में राहत मिल गई.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने जियानी इन्फैन्टिनो से बातचीत के दौरान बालोगुन को दिखाए गए रेड कार्ड और उस पर लगे एक मैच के प्रतिबंध को लेकर सवाल किए. इसके बाद अपील की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें अमेरिकी सरकार ने कुछ अतिरिक्त सबूत भी पेश किए. आखिरकार अपील बोर्ड ने खिलाड़ी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए उपलब्ध हो गए.
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘राष्ट्रपति और इन्फैन्टिनो के बीच बातचीत हुई थी. राष्ट्रपति यह समझना चाहते थे कि रेड कार्ड क्यों दिया गया और खिलाड़ी को निलंबित क्यों किया गया. अपील की प्रक्रिया एक स्वतंत्र बोर्ड के जरिए चलती है. अमेरिकी सरकार ने कुछ अतिरिक्त सबूत भी उपलब्ध कराए, जिनका अपील के दौरान इस्तेमाल किया गया. आखिरकार सही और उचित फैसला लिया गया.’

बालोगुन को बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ ग्रुप चरण के मुकाबले में 64वें मिनट पर रेड कार्ड मिला था. सामान्य नियमों के अनुसार उन्हें अगले मैच से बाहर रहना था, लेकिन फीफा की अनुशासन समिति ने उनके एक मैच के स्वचालित प्रतिबंध को एक साल की परिवीक्षा अवधि के लिए स्थगित कर दिया.
फीफा ने अपने बयान में कहा, ‘एफडीसी के अनुच्छेद 27 के तहत अमेरिका के खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन पर लगने वाले एक मैच के स्वचालित निलंबन को एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए स्थगित किया जाता है.”
फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “सही फैसला लेने और एक बड़े अन्याय को खत्म करने के लिए फीफा का धन्यवाद.’ फीफा के इस फैसले पर नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबक्केन ने कड़ी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि जब वीएआर ने भी रेड कार्ड को सही माना था, तब प्रतिबंध हटाने का कोई आधार नहीं बनता.
उन्होंने बोला, ‘मुझे पूरी ईमानदारी से कहना होगा कि फीफा ने बहुत बड़ी गलती की है. खिलाड़ी को रेड कार्ड मिला था और वीएआर ने भी उसे सही ठहराया था. ऐसे में नियमों के मुताबिक अगले मैच का निलंबन तय था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर अब हर रेड कार्ड के बाद इस तरह फैसले बदलने लगेंगे तो आगे क्या होगा? क्या हर मामले में कोई समिति बैठकर कार्ड हटाएगी? यह बहुत खराब फैसला है.
इससे विश्व कप की छवि को नुकसान पहुंचेगा. अगर अमेरिका आगे बढ़ता है तो इस फैसले की चर्चा हमेशा उसके साथ जुड़ी रहेगी. यह खेल के हित में बिल्कुल भी अच्छा नहीं है.’ बैन हटने के बाद फोलारिन बालोगुन अब बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेल सकेंगे.
हालांकि, उनके खेलने से ज्यादा चर्चा फीफा के फैसले और उस पर कथित राजनीतिक दखल की हो रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने विश्व कप के बीच निष्पक्षता और नियमों के समान पालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है.