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पूर्वांचल पर बाढ़ का खतरा मंडराया: बढ़ते जलस्तर को देख सीएम योगी अलर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की आपात समीक्षा बैठक, दिए सख्त निर्देश

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ लखनऊ/जौनपुर: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से गोमती (जौनपुर) और घाघरा (अयोध्या, बलिया, बाराबंकी) नदियों के जलस्तर में हुई अचानक और भारी वृद्धि ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (8 जुलाई) अपने सरकारी आवास से एक उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और बाढ़ प्रभावित होने वाले सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों (DMs) और पुलिस अधीक्षकों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश: ‘एक भी जनहानि बर्दाश्त नहीं’

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और सख्त शब्दों में कहा कि आपदा के इस समय में प्रशासन की पहली प्राथमिकता हर हाल में आम जनता के जीवन की सुरक्षा करना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीएम योगी द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश:

1. तटबंधों की 24×7 निगरानी: सिंचाई विभाग के इंजीनियरों और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नदियों के बांधों और तटबंधों की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग करें। जहां भी तटबंध कमजोर हों, वहां तुरंत बालू के बोरों और बोल्डर्स से पैचिंग की जाए।
2. राहत सामग्री और नौकाएं: सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि बाढ़ राहत शिविरों को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाए। वहां पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन (राहत किट), शुद्ध पेयजल, तिरपाल और जीवन रक्षक दवाइयां पहले से ही स्टॉक कर ली जाएं।
3. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती: संवेदनशील इलाकों में पीएसी (PAC) की फ्लड कंपनी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टुकड़ियों को मोटर बोट्स के साथ एडवांस में तैनात कर दिया गया है।
4. पशुओं की सुरक्षा: मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि बाढ़ में फंसे पशुओं के लिए ऊंचे स्थानों पर ‘पशु राहत शिविर’ बनाए जाएं और उनके लिए पर्याप्त चारे तथा पशु-टीकाकरण की व्यवस्था की जाए।

नदियों का वर्तमान हाल

वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, घाघरा नदी एल्गिन ब्रिज (बाराबंकी) और तुर्तीपार (बलिया) में खतरे के निशान को पार कर चुकी है, जिससे दर्जनों तराई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। वहीं जौनपुर में गोमती नदी भी उफान पर है और शहरी इलाकों के निचले हिस्सों में पानी घुसने लगा है। मुख्यमंत्री की इस समीक्षा बैठक के बाद पूरा सरकारी तंत्र हाई-अलर्ट मोड में आ गया है और आपातकालीन नंबरों (कंट्रोल रूम) को सार्वजनिक कर दिया गया है।