वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक: अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मसौदे पर मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ की अहम बैठक, पारदर्शिता पर जोर

अभिषेक सिंह/नई दिल्ली: आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा ‘वक्फ अधिनियम’ (Waqf Act) में महत्वपूर्ण संशोधन करने की तैयारियों के बीच, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) ने एक अहम कदम उठाया है। किसी भी विवाद या भ्रम की स्थिति को दूर करने और आम सहमति बनाने के उद्देश्य से, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक के प्रस्तावित मसौदे पर चर्चा करने के लिए देश के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं, इस्लामिक विद्वानों और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है।
क्या हैं प्रस्तावित संशोधन?
देश भर में वक्फ बोर्डों के पास रक्षा और रेलवे के बाद भारत में सबसे बड़ी अचल संपत्ति (Land Bank) मौजूद है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे (Land Grabbing) की हजारों शिकायतें सामने आई हैं। सरकार द्वारा लाए जा रहे संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य इसी व्यवस्था में ‘पारदर्शिता और जवाबदेही’ (Transparency and Accountability) लाना है।
प्रस्तावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं:
- 1. ट्रिब्यूनल की शक्तियों पर अंकुश: वर्तमान में वक्फ ट्रिब्यूनल को असीमित शक्तियां प्राप्त हैं। संशोधन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने से पहले सख्त कानूनी प्रक्रिया का पालन हो।
- 2. संपत्तियों का डिजिटलीकरण: सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग (Geo-tagging) और अनिवार्य डिजिटलीकरण किया जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति या माफिया उन पर कब्जा न कर सके।
- 3. आय का सदुपयोग: संपत्तियों से होने वाली आय को अनिवार्य रूप से मुस्लिम समुदाय के गरीब बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और विधवाओं के कल्याण पर खर्च करने के लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे।
धर्मगुरुओं के साथ बैठक का उद्देश्य
बैठक के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि इन संशोधनों का उद्देश्य वक्फ बोर्ड को कमजोर करना नहीं है, बल्कि उसे माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराना है। मंत्रालय ने धर्मगुरुओं के सुझावों को धैर्यपूर्वक सुना। कुछ संगठनों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि संशोधन से वक्फ की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नए बिल में पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा सुनिश्चित किया जाएगा। इस बैठक के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि संसद में विधेयक पेश करते समय सरकार एक संतुलित ड्राफ्ट लेकर आएगी।