भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘QDENGA’ को दी मंजूरी, इसके लिए प्री-वैक्सीनेशन टेस्ट की अब कोई जरूरत नहीं

विवेक ओझा / नई दिल्ली: भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए, भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ (QDENGA) के आपातकालीन उपयोग और व्यावसायिक बिक्री को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह वैक्सीन जापानी फार्मास्युटिकल दिग्गज ‘ताकेदा’ (Takeda) द्वारा विकसित की गई है। भारत जैसे देश के लिए, जहां हर साल मॉनसून के दौरान डेंगू बुखार (Dengue Fever) एक जानलेवा महामारी का रूप ले लेता है, यह वैक्सीन एक बहुत बड़ी ‘संजीवनी’ साबित होने वाली है।
क्यूडेंगा (QDENGA) की सबसे बड़ी खासियत
इस वैक्सीन की सबसे क्रांतिकारी बात यह है कि इसे लगवाने से पहले किसी भी प्रकार के ‘प्री-वैक्सीनेशन ब्लड टेस्ट’ (Pre-vaccination Test) की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पहले बाजार में आई ‘डेंगवैक्सिया’ (Dengvaxia) जैसी वैक्सीन्स को केवल उन्हीं लोगों को लगाया जा सकता था, जिन्हें जीवन में पहले कभी डेंगू हो चुका हो। अगर बिना पहले संक्रमण वाले व्यक्ति को वह वैक्सीन लगा दी जाती, तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती थी। लेकिन क्यूडेंगा के साथ ऐसा कोई जोखिम नहीं है। यह उन लोगों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है, जिन्हें कभी डेंगू नहीं हुआ।
चारों स्ट्रेन्स (Serotypes) पर असरदार
डेंगू के वायरस के चार अलग-अलग स्ट्रेन (DENV 1, 2, 3 और 4) होते हैं। क्यूडेंगा एक ‘लाइव-एटेन्यूएटेड’ (Live-attenuated) वैक्सीन है, जो डेंगू के इन चारों प्रकारों के खिलाफ शरीर में मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) विकसित करती है। क्लिनिकल ट्रायल्स में यह साबित हुआ है कि यह वैक्सीन डेंगू के कारण होने वाले अस्पताल में भर्ती होने (Hospitalization) के मामलों को 80 प्रतिशत तक और गंभीर बीमारियों को 90 प्रतिशत तक कम कर देती है।
कब से और किसे मिलेगी वैक्सीन?
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह वैक्सीन 4 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र के लोगों को लगाई जा सकेगी। इसका कोर्स दो खुराकों (Doses) का होगा, जो 3 महीने के अंतराल पर दी जाएंगी। उम्मीद है कि सरकार आगामी मॉनसून सीजन से पहले इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (National Immunization Program) के तहत कुछ अत्यधिक प्रभावित राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर सकती है, जिसके बाद इसे पूरे देश के निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह वैक्सीन भारत को डेंगू-मुक्त बनाने की दिशा में सबसे बड़ा हथियार साबित होगी।