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मेदांता अस्पताल में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सफदरजंग से शिफ्ट किए गए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने जा रहे 15 विपक्षी सांसदों को पुलिस ने अस्पताल के बाहर रोका

पल्लवी श्रीवास्तव/ गुरुग्राम / नई दिल्ली: शिक्षा सुधार और नीट परीक्षा विवाद में अनशन कर रहे सुप्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मुद्दा अब दिल्ली की सीमाओं को पार कर हरियाणा के गुरुग्राम तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित निजी ‘मेदांता अस्पताल’ (Medanta Hospital) में शिफ्ट किया गया। हालांकि, गुरुवार को मेदांता अस्पताल परिसर उस समय राजनीतिक अखाड़ा बन गया, जब वांगचुक का हाल-चाल जानने पहुंचे 15 विपक्षी सांसदों के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया।

सांसदों का प्रतिनिधिमंडल और पुलिस की नाकेबंदी

विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) के 15 सांसदों, जिनमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों और द्रमुक (DMK) के प्रमुख नेता शामिल थे, का एक दल दोपहर करीब 2:00 बजे मेदांता अस्पताल पहुंचा। लेकिन गुरुग्राम पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमों ने अस्पताल के बाहर पहले से ही बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा (Multi-tier Security) बना रखा था। पुलिस अधिकारियों ने सांसदों को यह कहते हुए अंदर जाने से रोक दिया कि अस्पताल में धारा 144 लागू है और कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि वांगचुक के पास किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अस्पताल के गेट पर जोरदार धरना

पुलिस द्वारा रोके जाने से नाराज विपक्षी सांसद अस्पताल के गेट के बाहर ही सड़क पर बैठकर विरोध जताने लगे। सांसदों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक बीमार और अहिंसक एक्टिविस्ट को ‘आतंकी’ की तरह अस्पताल में कैद करके रख रही है। सांसदों का तर्क था कि वे केवल एक नागरिक के रूप में उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने आए थे, न कि कोई राजनीतिक रैली करने। लगभग दो घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के पास भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई।

वांगचुक की स्थिति स्थिर, डॉक्टरों की निगरानी

दूसरी ओर, मेदांता अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक को आईसीयू (ICU) से एक विशेष प्राइवेट वार्ड में रखा गया है। लगातार अनशन के कारण उनके शरीर में क्रोनिक डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और किडनी संकेतकों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। डॉक्टरों की एक वरिष्ठ टीम उनकी 24 घंटे निगरानी कर रही है। पुलिस द्वारा सांसदों को वापस भेजे जाने के बाद अस्पताल परिसर की सुरक्षा और अधिक सख्त कर दी गई है।