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जंतर-मंतर हिंसा की जांच तेज, पहली एफआईआर में सुनियोजित षड्यंत्र का आरोप

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में 21 जुलाई को दर्ज पहली एफआईआर में इसे सुनियोजित साजिश बताया गया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई में हिंसा भड़काई गई और इसके लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं ने असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल किया। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा सकती है।

 

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के निर्देश पर मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंप दी गई है। 20 जुलाई की हिंसा से जुड़े 20 मामलों में यह पहली एफआईआर 21 जुलाई को संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई। थाना प्रभारी इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनों की 15 गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें दंगा, आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, पुलिसकर्मियों पर हमला और हथियार छीनने जैसे आरोप शामिल हैं।

 

एफआईआर के अनुसार, 20 जुलाई की रात करीब 10:11 बजे नेताओं के संबोधन के बाद भीड़ उग्र हो गई। दावा किया गया है कि सीजेपी प्रमुख के संसद मार्च के आह्वान पर रात में 10 से 11 हजार लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे। आरोप है कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनकारियों को लगातार उकसाते रहे और सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरों व डंडों से हमला करने के लिए भड़काते रहे।

 

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। हवलदार मुकुंद पर हमला कर उनका हथियार छीन लिया गया, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने का भी प्रयास किया गया।

 

इस बीच, जांच एजेंसियों ने प्रदर्शन के समर्थन में सोशल मीडिया पर सक्रिय बड़े इंफ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और कंटेंट प्रमोशन से जुड़ी तीन कंपनियों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई लोकप्रिय इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब क्रिएटर्स को प्रदर्शन के समर्थन में पोस्ट करने के लिए प्रति पोस्ट 40 हजार से 80 हजार रुपये तक भुगतान किए जाने की आशंका है। एजेंसियां डिजिटल अभियान, वित्तीय लेनदेन और विभिन्न पक्षों के बीच संभावित समन्वय की जांच कर रही हैं। भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का भी मिलान किया जा रहा है।