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ई-कोर्ट्स (e-Courts) प्रोजेक्ट का ऐतिहासिक विस्तार: देश भर में 1.25 करोड़ से अधिक मामले हुए डिजिटल रूप से दर्ज

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली

भारतीय न्यायपालिका में तकनीक के समावेश और डिजिटलीकरण (Digitization) ने एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल कर ली है। केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा संचालित ‘ई-कोर्ट्स (e-Courts) प्रोजेक्ट’ के फेज-III के तहत देश भर की अदालतों में ई-फाइलिंग सिस्टम को जबरदस्त सफलता मिल रही है। विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस प्रणाली के शुरू होने से लेकर अब तक पूरे भारत में 1.25 करोड़ से अधिक अदालती मामले पूरी तरह से डिजिटल (Paperless) रूप में दर्ज किए जा चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के कानूनी ढांचे को ‘डिजिटल-नेटिव’ (Digital-Native) पर्यावरण की ओर ले जा रही है, जहां मामलों की शुरुआत से लेकर उनके निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया कागज रहित हो गई है। वकीलों और वादियों (Litigants) को अब अदालतों के चक्कर काटने और भारी-भरकम फाइलें ले जाने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रणाली के तहत घर बैठे या ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित ई-सेवा केंद्रों (e-Sewa Kendras) के माध्यम से मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह न केवल न्याय तक आम आदमी की पहुंच को आसान बना रहा है, बल्कि इससे अदालतों में लंबित मामलों (Pendency) को तेजी से निपटाने में भी भारी मदद मिल रही है। ई-कोर्ट्स परियोजना का लक्ष्य 2028 तक देश की सभी जिला और अधीनस्थ अदालतों को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और क्लाउड-बेस्ड स्टोरेज से जोड़ना है।