जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव
2 साल से अधिक की देरी पर अब 'न्यायिक मजिस्ट्रेट' की मंजूरी होगी अनिवार्य

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए लोकसभा में ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026’ पेश किया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किए गए इस बिल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को समय पर जन्म और मृत्यु दर्ज कराने के लिए प्रेरित करना और फर्जी दस्तावेजों के निर्माण पर रोक लगाना है।
वर्तमान 1969 के कानून के तहत, यदि जन्म या मृत्यु दर्ज कराने में एक साल से अधिक की देरी होती है, तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या एक अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के आदेश की आवश्यकता होती है। यह नियम चाहे 13 महीने की देरी हो या 13 साल की, समान रूप से लागू होता था।
लेकिन नए संशोधन विधेयक के अनुसार, दो साल से अधिक (Delayed Registration) की देरी वाले मामलों के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब 2 वर्ष से अधिक की देरी पर पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate of the First Class) का आदेश अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि न्यायिक जांच का स्तर जुड़ने से पुरानी और संदिग्ध प्रविष्टियों (Entries) पर लगाम लगेगी और सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Civil Registration System) के डेटा की सत्यता बनी रहेगी।