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स्मार्ट सिटी से आगे की सोच: कैसा होगा एक ‘वाटर-वाइज’ शहर और भारत यह लक्ष्य कैसे हासिल कर सकता है?

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, जहां भारत के प्रमुख शहर (जैसे बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली) गर्मियों में भयानक जल संकट और मानसून में विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहे हैं, वहां शहरी नियोजन में एक नए शब्द की चर्चा जोरों पर है – ‘वाटर-वाइज सिटी’ (Water-wise City)। ‘द हिंदू’ के हालिया विश्लेषण में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई है कि एक ‘वाटर-वाइज’ शहर कैसा दिखेगा और भारत वहां तक कैसे पहुंच सकता है।

एक ‘वाटर-वाइज’ या जल-बुद्धिमान शहर वह है जो जल चक्र के हर पहलू का सम्मान करता है। ऐसे शहर में बारिश के पानी को दुश्मन समझकर नालों में नहीं बहाया जाता, बल्कि ‘स्पंज सिटी’ (Sponge City) की तर्ज़ पर उसे ज़मीन में सोखने (Groundwater recharge) की व्यवस्था होती है। इनमें पक्की कंक्रीट की सड़कों के बजाय ‘पारगम्य’ (Permeable) फुटपाथ होते हैं, जो पानी को अंदर जाने देते हैं। इसके अलावा, ऐसे शहरों में अपशिष्ट जल (Wastewater) का 100% उपचार कर उसे पार्कों और उद्योगों में दोबारा इस्तेमाल (Recycle) किया जाता है।

भारत के लिए इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण लेकिन अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले झीलों और तालाबों पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाना होगा। पुरानी और लीक हो रही पाइपलाइनों की मरम्मत करनी होगी, जिससे हर साल लाखों लीटर पीने योग्य पानी बर्बाद होता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को ‘ग्रे इंफ्रास्ट्रक्चर’ (पाइप और सीमेंट) के साथ-साथ ‘ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ (पेड़, वेटलैंड्स) पर भी भारी निवेश करना होगा। नीति निर्माताओं को समझना होगा कि केवल स्मार्ट तकनीक से शहर नहीं बचेंगे, उन्हें जल-संवेदनशील बनाना समय की सबसे बड़ी मांग है।