स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता: फर्जी और मनगढ़ंत डेटा के खिलाफ स्वास्थ्य मंत्रालय ने लागू किए सख्त उपाय
अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारतीय दवा उद्योग (Pharmaceutical Industry) और क्लिनिकल रिसर्च की वैश्विक साख को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम कदम उठाया है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में फर्जी या मनगढ़ंत डेटा (fake or fabricated data) को रोकने के लिए सख्त उपाय पेश किए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में, विदेशों में निर्यात होने वाले कुछ भारतीय कफ सिरप और दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में पाया गया था कि कुछ दवा कंपनियों और रिसर्च लैब्स ने ड्रग रेगुलेटर (CDSCO) से मंज़ूरी पाने के लिए क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा में हेरफेर किया था या फर्जी आंकड़े पेश किए थे। इस तरह का मनगढ़ंत डेटा न केवल मरीजों की जान जोखिम में डालता है, बल्कि दुनिया भर में ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहे जाने वाले भारत की छवि को भी भारी नुकसान पहुंचाता है।
नए सख्त उपायों के तहत, अब सभी क्लिनिकल ट्रायल्स और दवा परीक्षणों का ‘रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग’ किया जाएगा। किसी भी डेटा एंट्री को ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी सुरक्षित तकनीक से लिंक करने का प्रस्ताव है, ताकि उसे बाद में बदला न जा सके। यदि कोई कंपनी या शोधकर्ता डेटा से छेड़छाड़ करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ उसके लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम को मरीज़ों की सुरक्षा और भारतीय दवाओं पर वैश्विक भरोसा बहाल करने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया है।