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भारतीय जनजातियों का अनूठा स्वास्थ्य रहस्य

उनके पारंपरिक आहार कैसे बनाते हैं उनके 'गट माइक्रोब्स' (Gut Microbes) को सबसे अलग?

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली और जंक फूड के कारण जब शहरी आबादी पेट की गंभीर बीमारियों और मोटापे से जूझ रही है, तब वैज्ञानिकों ने भारतीय आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य का एक अनोखा रहस्य उजागर किया है। एक ताज़ा वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनजातियों (Indian tribes) के पारंपरिक आहार (Traditional diets) उनके पेट में मौजूद ‘गट माइक्रोब्स’ (Gut Microbes) को एक विशिष्ट और अनूठा आकार देते हैं, जो उन्हें कई बीमारियों से बचाता है।

‘गट माइक्रोब्स’ (आंत के बैक्टीरिया) हमारे पाचन तंत्र में पाए जाने वाले करोड़ों सूक्ष्म जीव होते हैं, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity), मानसिक स्वास्थ्य और पाचन में अहम भूमिका निभाते हैं। शोधकर्ताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों (जैसे भील, संथाल और गोंड) की आंतों के माइक्रोबायोम का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि शहरी लोगों की तुलना में इन जनजातियों के पेट में बैक्टीरिया की विविधता (Diversity) कहीं अधिक और बेहतर है।

इसका मुख्य कारण उनका ‘पारंपरिक आहार’ है, जो सीधे प्रकृति से जुड़ा होता है। उनके भोजन में भारी मात्रा में फाइबर, मोटे अनाज (Millets), जंगली कंद-मूल, और किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। वे प्रसंस्कृत (Processed) चीनी और रिफाइंड तेल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते। फाइबर युक्त यह प्राकृतिक आहार उन ‘अच्छे बैक्टीरिया’ को पनपने में मदद करता है, जो आंतों की सूजन (Inflammation) को रोकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह शोध शहरी आबादी के लिए एक बड़ी चेतावनी और सीख है कि अगर हमें बीमारियों से बचना है, तो हमें वापस अपनी जड़ों और प्राकृतिक आहार की ओर लौटना होगा।