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जयपुर में 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक संपन्न, ‘जयपुर सहमति’ और एमएसएमई क्रेडिट सिद्धांतों को मंजूरी

जयपुर ( इंडियन व्यू टीम) : भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत शुक्रवार को जयपुर के सवाई मान महल में 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्य देशों ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को अधिक सुदृढ़ और विविध बनाने तथा एमएसएमई के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया। बैठक में ‘जयपुर सहमति’ जारी करने के साथ निर्यात से जुड़े एमएसएमई के लिए क्रेडिट असेसमेंट गाइडिंग प्रिंसिपल्स को मंजूरी दी गई।

भारत के नेतृत्व की सराहना

बैठक में ब्रिक्स सदस्यों ने ‘ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030’ को अंतिम रूप देने की दिशा में हुई प्रगति के लिए भारत के नेतृत्व की सराहना की। मंत्रियों ने रणनीति को ब्रिक्स शीर्ष नेताओं के अंतिम अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने पर सहमति जताई। रणनीति में व्यापार, सेवाएं, डिजिटल अर्थव्यवस्था, उद्योग, नवाचार, प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्तीय सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

किसानों और खाद्य सुरक्षा पर भारत का जोर

पीयूष गोयल ने भारत के किसानों के हितों की रक्षा और खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) को केंद्र में रखकर सुधार-उन्मुख, विकास-केंद्रित और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने विकासशील देशों के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार के प्रावधानों को सुरक्षित रखने तथा विवाद समाधान की पूरी तरह कार्यशील दो-स्तरीय और बाध्यकारी व्यवस्था बहाल करने की वकालत की।

‘जयपुर सहमति’ से छोटे कारोबारियों को फायदा

बैठक में व्यापार वित्त की कमी दूर करने और छोटे व्यवसायों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘जयपुर सहमति’ को अपनाया गया। इसके तहत ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग सिस्टम का अध्ययन किया जाएगा। निर्यात से जुड़े एमएसएमई के लिए क्रेडिट असेसमेंट गाइडिंग प्रिंसिपल्स को भी मंजूरी दी गई है, जिससे छोटे उद्यमों के मूल्यांकन में उनकी गिरवी संपत्तियों के बजाय कैश फ्लो को अधिक महत्व देने का रास्ता खुलेगा।

2.5 ट्रिलियन डॉलर के ट्रेड फाइनेंस गैप को पाटने पर जोर

इन पहलों का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में मौजूद करीब 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेड फाइनेंस गैप को कम करना है, जिसका असर छोटे उद्योगों पर विशेष रूप से पड़ता है। एमएसएमई के अंतर्राष्ट्रीयकरण की कार्ययोजना में इन उपायों को शामिल किया गया है, जिससे छोटे कारोबारियों को वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।