संसद में हंगामे पर प्रधानमंत्री ने जताई गंभीर चिंता
NDA सांसदों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग में दिया अनुशासन और आक्रामकता का नया मंत्र
सरिता त्रिपाठी/नई दिल्ली: संसद के चल रहे मानसून सत्र में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे और कार्यवाही बाधित होने के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों के साथ एक बेहद अहम ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ (नाश्ते पर बैठक) की है। इस रणनीतिक बैठक में प्रधानमंत्री ने संसद में हो रहे लगातार व्यवधानों (Disruptions) पर गहरी चिंता और नाराज़गी व्यक्त की है, साथ ही अपने सांसदों को आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने का स्पष्ट खाका भी सौंपा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष जानबूझकर महत्त्वपूर्ण विधायी कार्यों और चर्चाओं को रोक रहा है ताकि सरकार को जनता के मुद्दों पर जवाब देने से रोका जा सके। उन्होंने सांसदों को निर्देश दिया है कि वे विपक्ष के इस ‘नकारात्मक एजेंडे’ के खिलाफ रक्षात्मक (Defensive) होने के बजाय पूरी तैयारी और आक्रामकता के साथ पलटवार करें। पीएम मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि सभी सांसद सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें, संसदीय नियमों का गहराई से अध्ययन करें और महत्वपूर्ण बिलों पर होने वाली बहस में तथ्यों के साथ अपनी बात रखें।
यह बैठक केवल संसदीय रणनीति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों (Election Preparedness) के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि उन्हें अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) में अधिक समय बिताना चाहिए। उन्होंने सांसदों को केंद्र सरकार की गरीब-कल्याण योजनाओं, ढांचागत विकास और आर्थिक उपलब्धियों को ज़मीनी स्तर पर आम जनता तक पहुंचाने का ‘टास्क’ दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस तरह की बैठकों के ज़रिए न केवल गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट और प्रेरित रखते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी के सांसद विपक्ष के नैरेटिव (विमर्श) का मुकाबला करने के लिए वैचारिक और तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह लैस रहें। इस बैठक के बाद अब संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष का रुख और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है।