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विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने की बड़ी तैयारी

'मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि' (Model BIT) में बदलाव जल्द, कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा मसौदा

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को रफ्तार देने की दिशा में केंद्र सरकार एक बेहद महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव करने जा रही है। आर्थिक मामलों के सचिव ने पुष्टि की है कि भारत सरकार अपनी ‘मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि’ (Model Bilateral Investment Treaty – BIT) को नया रूप देने (Revamp) के अंतिम चरण में है और इसका नया मसौदा जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) की मंज़ूरी के लिए पेश किया जाएगा।

द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) दो देशों के बीच एक ऐसा कानूनी समझौता होता है जो विदेशी निवेशकों को एक सुरक्षित और पारदर्शी माहौल प्रदान करता है। भारत ने 2016 में अपना ‘मॉडल BIT’ लागू किया था, जिसका उद्देश्य केयर्न एनर्जी और वोडाफोन जैसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता (International Arbitration) विवादों से बचना था। हालांकि, 2016 के कड़े प्रावधानों के कारण कई यूरोपीय और पश्चिमी देशों ने भारत के साथ नई संधियां करने में हिचकिचाहट दिखाई थी। विदेशी निवेशकों की शिकायत थी कि पुराने मॉडल में विवाद निपटान तंत्र (Dispute Resolution) बहुत जटिल है और यह निवेशकों के संरक्षण के बजाय सरकार के अधिकारों को अधिक तरजीह देता है।

अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR) और अर्थव्यवस्था (Economy) के छात्रों के लिए यह बदलाव एक प्रमुख ‘केस स्टडी’ है। नए संशोधित मॉडल में सरकार निवेशकों की सुरक्षा (Investor Protection) और राज्य के संप्रभु अधिकारों (Sovereign Regulatory Rights) के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इसमें मध्यस्थता के नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने वाले प्रावधान शामिल किए जाने की उम्मीद है। यदि यह नया मॉडल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ चल रही मुक्त व्यापार वार्ता (FTA) से पहले मंज़ूर हो जाता है, तो यह भारत में विदेशी निवेश की बाढ़ ला सकता है।