परीक्षा विवादों पर पूर्व शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान
'राष्ट्रहित से ऊपर कुछ नहीं, जेन-ज़ी (Gen Z) हमारे अपने बच्चे हैं': धर्मेंद्र प्रधान
अभिषेक सिंह/ भुवनेश्वर / नई दिल्ली: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के कारण उपजे कड़े राजनीतिक और सामाजिक तनाव के बीच पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान सामने आया है। ओडिशा के भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने खुलासा किया है कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर प्रदर्शनकारी छात्रों की जायज़ मांगों को स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री की मंज़ूरी (PM’s approval) मांगी थी।
हाल के महीनों में नीट (NEET) और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में धांधली को लेकर ‘जनरेशन ज़ी’ (Gen Z – युवा पीढ़ी) के छात्रों ने जिस तरह सड़कों पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था, उसने सरकार पर भारी दबाव बना दिया था। इस पूरी स्थिति पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा, “राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी नहीं है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आंदोलन कर रहे ये जेन-ज़ी (Gen Z) युवा हमारे अपने बच्चे हैं, और उनके भविष्य तथा उनके सपनों की रक्षा करना हमारी नैतिक और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी है।”
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को छात्रों की चिंताओं और परीक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता के बारे में विस्तार से अवगत कराया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी इस बात पर पूर्ण सहमति जताई और छात्रों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद स्थापित करने तथा उनकी मांगों को सहानभूतिपूर्वक हल करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया और कई कड़े कदम उठाए।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, पूर्व शिक्षा मंत्री का यह बयान युवाओं के बीच सरकार की छवि को सुधारने और उनके गुस्से को शांत करने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच, सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनके साथ खड़ी है और देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।