थिएटर कमानों पर अंतिम रिपोर्ट विचारधीन, केंद्र ने संसदीय समिति को बताया

नई दिल्ली ( विवेक ओझा) : भारतीय सेना के लिए थिएटर कमानों ( Theatre commands) को चालू (क्रियान्वित) करने की लंबे समय से लंबित योजना एक निर्णायक चरण में पहुँच गई है। संसद में पेश रक्षा मामलों की स्थायी समिति की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सशस्त्र बलों के प्रस्तावित पुनर्गठन पर अंतिम रिपोर्ट अब सरकार के विचारधीन है।

थिएटर प्रणाली का यह अभ्यास (Theatrisation exercise ) तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) की क्षमताओं को एकीकृत परिचालन कमान संरचनाओं ( Unified operational command structures) के तहत लाकर एक अधिक एकीकृत युद्ध क्षमता वाली संरचना (more integrated war-fighting structure ) बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि मई के अंत में जनरल अनिल चौहान के पदमुक्त होने के बाद जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि की रक्षा प्रमुख (सीडीएस) के रूप में नियुक्ति के साथ ही थिएटर प्रणाली की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है।

थियेटर कमांड का औचित्य: 

किसी भी देश के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत होती है। आम नागरिक, संगठनों, संपत्ति, स्थल सीमा, तटों को सुरक्षित करने के लिए भारत के पास एक बड़ा तंत्र और तीन सेनाओं का बल है और इन्हीं तीनों सेनाओं में देश की सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग और तालमेल को बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

देश में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और बेहतर बनाने के लिए मोदी सरकार ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’ बनाने पर जोर दे रही है। थिएटर कमांड का मतलब है कि किसी भी सीमा पर जमीन से लेकर आसमान तक सारे फैसले एक ही कमांडर लेंगे, यानी थल, वायु और नौसेना के लिए एक ही कमांडर होगा।

थिएटर कमांड (Joint Theatre Commands) का मसौदा पूरी तरह तैयार है, बस सरकार की मंजूरी का इंतजार है। हर कमांड की लीडरशिप आर्मी, एयर फोर्स या नेवी के थ्री स्टार अफसर करेंगे और सभी थिएटर कमांड की अगुवाई चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ करेंगे। सेना प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने चीन, पाकिस्तान और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए अलग-अलग कमांड और कंट्रोल सिस्टम के साथ एक खाका तैयार किया है। यह कमांड एक सीमा-एक कमान के सिद्धांत पर काम करेंगी यानी हर कमांड के पास एक सीमा की पूरी जिम्मेदारी होगी।

 

थिएटर कमांड बनाने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, राष्ट्रीय रक्षा रणनीति : 

थिएटर कमांड बनाने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और उच्च रक्षा संगठन होना आवश्यक है, इसके बाद ही थियेटर कमांड के बारे में सोचना तर्कपूर्ण रहेगा। सेना के पुनर्गठन की बात करें तो मानव संसाधन प्रबंधन, आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी का समावेश, पुनर्संतुलन और पुनर्गठन तथा संयुक्तता और बेहतर एकीकरण इसके चार प्रमुख पहलू हैं। एनएसएस के साथ एक ऐसे उच्च रक्षा संगठन की भी आवश्यकता है, जो पूरे देश के दृष्टिकोण को प्रभावी करे और उसमें सभी संबंधित मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व हो।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की अध्यक्षता में एक शीर्ष स्तरीय रक्षा योजना समिति की स्थापना 2018 में की गई थी, जिसे एनएसएस और एनडीएस तैयार करना था लेकिन अब तक इस पर कोई प्रगति नहीं हो पाई है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए जरूरी है कि इसके संस्थागत, संगठनात्मक ढांचे को और अधिक तार्किक और परिणाममूलक बनाया जाय और सभी आवश्यक संसाधनों का प्रबंधन करते हुए थियेटर कमांड बनाने की दिशा में बढ़ा जाए। दुनिया भर के 32 से अधिक देशों के पास अपने सैन्य बलों के बीच बेहतर एकीकरण लाने के लिए पहले से ही किसी न किसी रूप में थिएटर या संयुक्त कमांड है। विशेष रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका थिएटर कमांड सिस्टम को लागू करने वाला पहला देश था, जिसमें वर्तमान में छह भौगोलिक और चार कार्यात्मक कमांड शामिल हैं। रूस ने भी 2008 में अपने रक्षा बलों के पुनर्गठन के साथ शुरुआत की थी और इसके चार थिएटर कमांड हैं। कहा जाता है कि चीन का थिएटर कमांड सिस्टम अमेरिकी मॉडल पर आधारित है और इसमें “शांति के समय में पांच भौगोलिक कमांड” हैं। चाइनीज वेस्टर्न थिएटर कमांड भारतीय सीमा से सटे इलाके को कवर करती है।

 

भारत में तीनों सेनाओं को मिलाकर थिएटर कमांड में आने वाली चुनौतियां : 

थिएटर कमांडों को लेकर देश में जो सबसे पहली चुनौती है वो ये है कि कोई भी कमांड एक जगह पर नहीं हैं। यानी कि ये थिएटर कमांड भारत में अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं। इससे सभी कमांडों को तालमेल बैठाने में दिक्कत होती है। इसकी वजह से थिएटर कमांडों की ऑपरेशनल एरिया भी दूर-दूर हैं। इसके अलावा, देश में 2 ट्राई सर्विस कमांड स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (एसएफसी) और अंडमान और निकोबार कमांड (एएनसी) हैं, जिसका नेतृत्व 3 सेवाओं के अधिकारियों द्वारा रोटेशन द्वारा किया जाता है। थिएटर कमांड में एक चुनौती ये भी है।

स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड देश की परमाणु हथियार को नियंत्रित और उसकी देखभाल करता है। यह 2003 में बनाया गया था, लेकिन इसकी किसी स्पष्ट क्षेत्र में और जिम्मेदारी नहीं है। वहीं इसके साथ ही यह एकीकृत थिएटर कमांड नहीं है, बल्कि एक एकीकृत फक्शनल कमांड है, जो परमाणु हथियारों के लिए है। वहीं भारत सरकार से साइबर, एयरोस्पेस और स्पेशल ऑपरेशंस कमांड जैसे अन्य एकीकृत फंक्शनल कमांड की मांग की गई है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसी को भी मंजूरी नहीं दी है।

 

युद्ध के दौरान ऐसा देखा गया है कि अलग-अलग थिएटर कमांड होने की वजह से सेनाओं के एक्शन में दोहराव या ओवरलैपिंग होती है। वहीं संसाधनों के साथ-साथ मैनपावर भी ज्यादा इस्तेमाल होता है। जबकि आज के दौर में विकसित देश तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। यही वजह थी कि भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को उनके तीन साल के कार्यकाल के भीतर तीनों सेनाओं का पुनर्गठन करके थिएटर कमांड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

 

थिएटर कमांड के फायदे : 

इससे भारतीय सेना पावरफुल होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, थिएटर कमांड के जरिए जिस खास तकनीक या संसाधन का इस्तेमाल एक सेना कर रही है, उसके अधिकार तीनों सेनाओं को मिलेंगे। यानी एक तकनीक या संसाधन का प्रयोग तीनाें सेना करेगी, इससे सैन्य बल को मजबूत मिलेगी और जंग जैसी इमरजेंसी से निपटना आसान हो जाएगा। आसान भाषा में समझें तो तीनों सेनाएं संसाधनों और हथियारों का इस्तेमाल एकसाथ करके दुश्मन को मुंहतोड़ा जवाब दे सकेंगी।

चुनौतियों से निपटना और अधिक आसान हो जाएगा। यह पहला मौका नहीं है जब थिएटर कमांड बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे पहले पूर्व सीडीएस बिपिन रावत भी चार थिएटर कमांड बनाने की कोशिश कर चुके हैं। उनका मानना था, इसका सही इस्तेमाल जंग के समय होता है और थिएटर कमांड में बनी रणनीति दुश्मनों और युद्ध की चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी।

थियेटर कमांड के गठन से पैसे की बचत होगी। थिएटर कमांड बनने से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ेगा। इसके कारण संसाधनों का बेहतर प्रयोग किया जा सकता है. नतीजा, सीधे तौर पर पैसों की बचत होगी। वर्तमान में देश में 15 लाख सैन्य बल है। इन्हें संगठित करके थिएटर कमांड का गठन होता है तो सैन्य बलों के आधुनिकीकरण का खर्च काफी हद तक घट जाएगा।

 

वर्षों से क्यों लंबित है थियेटर कमांड की धारणा : 

देश में कई बार थिएटर कमांड बनाने की बात कही गई है, लेकिन यह बन नहीं पाया। इसकी वजह तीनों सेनाओं के बीच मतभेद रहा है।।थल सेना का मानना रहा है कि तालमेल ऐसा होना चाहिए कि मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके। वायुसेना का तर्क रहा है कि उसके पास पर्याप्त साधन नहीं हैं और भौगोलिक नजरिये से देखें तो भारत ऐसा देश नहीं है जहां थिएटर कमांड को बनाने की जरूरत पड़े। वहीं, नौसेना वर्तमान के मॉडल को ही बेहतर मानती है। इसके अलावा एक और बड़ी वजह रही है। कहा जाता है कि थिएटर कमांड बनने पर 4 स्टार रैंक में कमी आएगी।

थियेटर कमांड को लेकर वायुसेना के मन में कुछ संशय :

विभिन्न सेवाओं और रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने उल्लेख किया है कि सेना और नौसेना थियेटर कमांड के गठन के प्रस्ताव के साथ हैं, पर वायु सेना के मन में कुछ आशंका और दुविधा है। प्रथम , वायु सेना नहीं चाहती कि वायु सेना प्रमुख वायु संपत्ति का परिचालन नियंत्रण खो दें। दूसरा, वायु सेना को चिंता है कि उसकी सारी संपत्ति इन एकीकृत थिएटरों में विभाजित हो सकती है। इस तरह के सभी मतभेदों और चिंताओं को दूर करने के लिए तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों की एक समिति का गठन किया गया है, और सीडीएस ने उनसे मुलाकात की थी। वायु सेना के सूत्रों ने कहा था कि रक्षा सेट-अप में इतना महत्वपूर्ण परिवर्तन होने से पहले ऐसी सभी चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता है।