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विनाशकारी तूफानों (Hurricanes) की सटीक भविष्यवाणी के लिए वैज्ञानिकों ने ली समुद्री 'शार्क' की मदद

सरिता त्रिपाठी/ मियामी / नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में समुद्री तूफानों और चक्रवातों (Cyclones/Hurricanes) की आवृत्ति और तीव्रता तेज़ी से बढ़ रही है। ऐसे में सटीक मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecasting) जान-माल की रक्षा के लिए सबसे अहम हथियार बन गया है। पारंपरिक सैटेलाइट्स और समुद्री बुवाई (Buoys) की सीमाओं को पार करते हुए, समुद्री जीव विज्ञानियों और मौसम विज्ञानियों ने एक बेहद अभिनव तरीका खोज निकाला है। वैज्ञानिक अब विनाशकारी तूफानों की सटीक भविष्यवाणी करने के लिए समुद्र के सबसे खूंखार शिकारी—’शार्क’ (Sharks)—का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रॉयटर्स (Reuters) की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक शार्क (विशेषकर टाइगर शार्क और हैमरहेड शार्क) के शरीर पर विशेष ‘सेंसर टैग’ (Sensor Tags) लगा रहे हैं। ये टैग समुद्र के तापमान, लवणता (Salinity), और बैरोमीटर के दबाव (Barometric Pressure) का रियल-टाइम डेटा सैटेलाइट के ज़रिए मौसम केंद्रों तक भेजते हैं।

लेकिन शार्क ही क्यों? इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक कारण है। शार्क ‘बैरोमेट्रिक दबाव’ में होने वाले मामूली बदलावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। जब भी कोई बड़ा तूफान समुद्र की सतह पर बनने लगता है, तो दबाव में तेज़ी से बदलाव होता है। इस बदलाव को भांपते हुए शार्क तूफानी रास्तों से दूर गहरे और शांत पानी की ओर पलायन करने लगती हैं। शार्क के इस व्यवहारिक परिवर्तन (Behavioral change) और उनके द्वारा भेजे गए गहराई के तापमान के डेटा का विश्लेषण करके, वैज्ञानिक तूफान की दिशा, उसकी तीव्रता और उसके ज़मीन से टकराने (Landfall) के सटीक समय का अनुमान लगा सकते हैं।

विज्ञान और पर्यावरण (Science & Tech) के दृष्टिकोण से यह ‘बायो-टेलीमेट्री’ (Bio-telemetry) का एक शानदार उदाहरण है, जहाँ जीव विज्ञान और मौसम विज्ञान मिलकर काम कर रहे हैं। पारंपरिक उपकरण अक्सर तूफानी लहरों में नष्ट हो जाते हैं, लेकिन शार्क समुद्र की गहराइयों में जाकर निर्बाध रूप से अहम डेटा उपलब्ध कराती हैं, जिससे आपदा प्रबंधन (Disaster Management) में एक नई क्रांति आ रही है।