अडानी समूह के लिए बड़ी वैश्विक जीत
अमेरिकी जज ने गौतम अडानी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला किया खारिज, निवेशकों में लौटी खुशी
सरिता त्रिपाठी/ वाशिंगटन डीसी / नई दिल्ली: भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाज़ार के लिए एक बेहद बड़ी और राहत देने वाली खबर अमेरिका से आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और वित्तीय स्क्रूटनी (जांच) का सामना कर रहे भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिकी न्याय प्रणाली से एक बड़ी क्लीन चिट मिली है। एक अमेरिकी जज ने गौतम अडानी के खिलाफ दायर किए गए भ्रष्टाचार (Graft) के एक हाई-प्रोफाइल मामले को पूरी तरह से खारिज (Dismiss) कर दिया है।
विदेशी समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और कुछ कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ था, जिसे लेकर अडानी समूह पर पिछले कुछ समय से अमेरिकी नियामकों और कानूनी संस्थाओं का दबाव था। अमेरिकी अदालत में सुनवाई के दौरान जज ने पाया कि अभियोजन पक्ष अडानी और उनके समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की वित्तीय हेराफेरी के पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह से विफल रहा है। साक्ष्यों के अभाव और कानूनी आधार की कमी के कारण अदालत ने इस मामले को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और इसे खारिज कर दिया।
यह कानूनी जीत गौतम अडानी और उनके पूरे साम्राज्य के लिए एक संजीवनी की तरह है। हिंडनबर्ग विवाद के बाद से अडानी समूह लगातार विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका, जो दुनिया का सबसे बड़ा और कड़ा वित्तीय बाज़ार माना जाता है, वहां की अदालत से क्लीन चिट मिलना अडानी समूह की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता पर एक बड़ी मुहर है।
इस खबर के आते ही भारतीय शेयर बाज़ारों में अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी तेज़ी देखने को मिलने की उम्मीद है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से अडानी समूह के अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स, विदेशी फंडिंग और ग्लोबल इन्वेस्टर्स के बीच रुकी हुई बातचीत को नई रफ्तार मिलेगी। यह फैसला साबित करता है कि महज़ आरोपों और बाज़ार की अटकलों के आधार पर दुनिया के किसी भी बड़े कारोबारी समूह को कानूनी रूप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।