अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों को लगा बड़ा झटका, ‘यूजर एडिक्शन’ मामले में हजारों मुकदमों को कोर्ट से मिली हरी झंडी
अभिषेक सिंह/वाशिंगटन डीसी: दुनिया की दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियों—जैसे मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम), गूगल (यूट्यूब) और बाइटडांस (टिकटॉक)—की मुश्किलें अब काफी बढ़ने वाली हैं। अमेरिका की एक अपीलीय अदालत (Appeals Court) ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए टेक कंपनियों के खिलाफ उन हज़ारों मुकदमों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, जिनमें इन कंपनियों पर जानबूझकर बच्चों और युवाओं को ‘सोशल मीडिया का आदी’ (Social Media Addiction) बनाने का आरोप लगाया गया है।
यह फैसला सिलिकॉन वैली के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। अमेरिका भर के कई स्कूलों, अभिभावकों और राज्यों ने इन कंपनियों पर आरोप लगाया था कि इनके प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम (Algorithms) इस तरह से डिज़ाइन किए गए हैं कि युवा यूज़र्स बार-बार स्क्रीन देखने के लिए मजबूर हो जाते हैं। याचिकाओं में दावा किया गया है कि ‘अनंत स्क्रॉलिंग’ (Infinite scrolling) और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस के कारण बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, नींद की कमी और आत्महत्या की प्रवृत्तियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।
टेक कंपनियों ने अदालत में दलील दी थी कि अमेरिकी कानून की ‘धारा 230’ (Section 230) के तहत उन्हें यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। लेकिन अपीलीय अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला केवल थर्ड-पार्टी कंटेंट का नहीं है, बल्कि कंपनियों के अपने ‘प्रोडक्ट डिज़ाइन’ और ‘एल्गोरिदम’ की खामियों का है, जो जानबूझकर लत लगाने के लिए बनाए गए हैं।
इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। अब इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अमेरिकी अदालतों में जूरी के सामने यह साबित करना होगा कि उनके उत्पाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं। यदि ये कंपनियां मुकदमे हारती हैं, तो उन्हें न केवल अरबों डॉलर का हर्जाना चुकाना पड़ सकता है, बल्कि अपने प्लेटफॉर्म्स के बुनियादी काम करने के तरीके (विशेषकर युवाओं के लिए) में भी भारी और कड़े बदलाव करने होंगे। इस फैसले ने पूरी दुनिया के नियामकों (Regulators) का ध्यान अपनी ओर खींचा है।