AI की दुनिया में वर्चस्व की जंग
मेटा (Meta) ने लॉन्च किया नया 'ओपन-वेट' मॉडल, गूगल और ओपनएआई (OpenAI) को मिलेगी सीधी टक्कर
विवेक ओझा/ सैन फ्रांसिस्को / नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में इन दिनों एक बेहद रोमांचक तकनीकी रेस चल रही है और इस रेस में मार्क ज़ुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) ने अपना एक और बड़ा दांव चल दिया है। एएफपी (AFP) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने वैश्विक स्तर पर एक नया ‘ओपन-वेट’ एआई मॉडल (Open-weight AI model) जारी किया है। कंपनी का यह कदम AI के भविष्य को लेकर उसके उस विजन को दर्शाता है, जिसमें वह शक्तिशाली तकनीक को मुट्ठी भर कंपनियों के नियंत्रण से निकालकर आम डेवलपर्स के हाथों में सौंपना चाहती है।
‘ओपन-वेट’ मॉडल का मतलब है कि दुनिया भर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और शोधकर्ता अब मेटा के इस उन्नत एआई सिस्टम के मुख्य आर्किटेक्चर को मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं। वे बिना भारी-भरकम खर्च किए इस मॉडल का अध्ययन कर सकते हैं और इसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज़ कर नए एप्लिकेशन बना सकते हैं।
मेटा की यह रणनीति सीधे तौर पर गूगल (Google) और चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) पर हमला है। गूगल और ओपनएआई अपने सबसे ताकतवर एआई मॉडल्स को ‘क्लोज्ड’ रखते हैं और उनका इस्तेमाल करने के लिए डेवलपर्स से भारी फीस वसूलते हैं। उनका तर्क है कि ओपन-सोर्स एआई खतरनाक हो सकता है और इसका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा सकता है। लेकिन मेटा का मानना है कि तकनीक को खुला (Open) रखने से नवाचार (Innovation) तेज़ी से होता है और सुरक्षा खामियों को कम्युनिटी मिलकर जल्दी दूर कर लेती है।
टेक जगत के जानकारों का कहना है कि मेटा का यह कदम AI के लोकतंत्रीकरण (Democratization of AI) की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। फ्री और पावरफुल एआई मॉडल देकर मेटा दुनिया भर के डेवलपर्स को अपने इकोसिस्टम का हिस्सा बना रही है, जो भविष्य में उसे एआई बाज़ार का निर्विवाद सरताज बना सकता है।