मध्य पूर्व की कूटनीति में आया भारी भूचाल: ईरान समझौते के बीच में आने पर डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान पर बमबारी करने की दी खुली धमकी

विवेक ओझा/ वाशिंगटन डीसी / मस्कट: वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व (Middle East) की नाज़ुक शांति व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली और आक्रामक खबर अमेरिका से सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए एक खुली धमकी दी है कि अगर ओमान (Oman) ने ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते में बाधा डाली या बीच में आने की कोशिश की, तो वे ओमान पर बमबारी (Bomb) कर देंगे। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक तनाव को अपने चरम पर पहुंचा दिया है।
इस भयंकर कूटनीतिक गतिरोध की जड़ें ओमान और ईरान के बीच चल रही उन रणनीतिक वार्ताओं में छिपी हैं, जिन पर अमेरिका की कड़ी नज़र है। जानकारी के अनुसार, ईरानी और ओमानी अधिकारी पिछले कई हफ्तों से महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों (Shipping routes) के माध्यम से भविष्य की समुद्री नेविगेशन व्यवस्थाओं पर बातचीत कर रहे हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब 17 अगस्त को तेहरान में विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा कर दी कि दोनों पक्ष एक ‘संयुक्त घोषणा’ (Joint Declaration) तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ओमान पारंपरिक रूप से मध्य पूर्व में एक शांत और तटस्थ मध्यस्थ (Mediator) के रूप में जाना जाता है, जिसने अतीत में अमेरिका और ईरान के बीच कई पर्दे के पीछे की वार्ताओं को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन इस बार ओमान और ईरान के बीच स्वतंत्र रूप से बढ़ रही नज़दीकियां और शिपिंग रूट पर उनका नियंत्रण अमेरिकी प्रशासन को रास नहीं आ रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ओमान और ईरान का यह समुद्री समझौता अमेरिका द्वारा ईरान पर बनाए जा रहे ‘अधिकतम दबाव’ (Maximum Pressure) की नीति को कमज़ोर कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक और अभूतपूर्व धमकी ने अरब दुनिया (Arab World) में भारी बेचैनी पैदा कर दी है। एक संप्रभु और शांत देश (ओमान) पर सैन्य हमले की खुलेआम धमकी देना अमेरिकी विदेश नीति के एक बेहद अप्रत्याशित और खौफनाक अध्याय को दर्शाता है। अगर अमेरिका और ओमान के बीच संबंध बिगड़ते हैं, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में कूटनीतिक अस्थिरता पैदा हो जाएगी, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ना तय है।