ओडिशा में ‘गिग वर्कर्स’ का फूटा गुस्सा: भुवनेश्वर में ऐप-आधारित कैब और बाइक ड्राइवरों की हड़ताल हुई हिंसक, पुलिस पर पथराव

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ भुवनेश्वर: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले कैब और बाइक ड्राइवरों का गुस्सा अब सड़कों पर हिंसक रूप ले चुका है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 17 अगस्त से ‘काम बंद’ (Cease-work) हड़ताल पर बैठे ये ड्राइवर उग्र हो गए और हालात को काबू करने के लिए तैनात किए गए पुलिस बलों के साथ उनकी तीखी झड़प हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को यह हड़ताल उस समय हिंसक हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों पर पथराव (hurled stones) शुरू कर दिया। इस भारी बवाल और आमने-सामने की झड़प (face-off) में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में (detained) ले लिया गया और दर्जनों वाहनों को ज़ब्त (seized) किया गया है।

इस व्यापक असंतोष की जड़ें ‘गिग इकॉनमी’ (Gig Economy) में काम करने वाले इन चालकों के आर्थिक शोषण से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारी ड्राइवर अपने 7-सूत्रीय मांग पत्र (seven-point charter of demands) को लागू करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में किराए में बढ़ोतरी (fare hike), कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले भारी एप्लीकेशन शुल्क में कमी (reduction in application fees), और सबसे महत्वपूर्ण—उचित सामाजिक सुरक्षा (social security) तथा अन्य लाभ शामिल हैं।

ड्राइवरों का आरोप है कि बड़ी मल्टीनेशनल एग्रीगेटर कंपनियां मनमाने ढंग से कमीशन वसूलती हैं और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद उन्हें उनका वाजिब हक़ नहीं दिया जा रहा है। घंटों काम करने के बावजूद उनके पास न तो कोई स्वास्थ्य बीमा है और न ही भविष्य निधि जैसी कोई सुरक्षा। इस हड़ताल के कारण भुवनेश्वर के आम यात्रियों और दैनिक वेतनभोगियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि शहर में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि राज्य और केंद्र सरकारों को जल्द ही अनौपचारिक क्षेत्र के इन ‘गिग वर्कर्स’ के अधिकारों की रक्षा के लिए एक ठोस कानूनी ढांचा तैयार करना होगा, अन्यथा इस तरह के असंतोष देश के अन्य शहरों में भी भड़क सकते हैं।