उत्तराखंड में ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान पर भारी राजनीतिक बवाल: कांग्रेस ने BJP पर लगाया ‘दलित विरोधी’ मानसिकता का आरोप, FIR की मांग

राघवेंद्र प्रताप सिंह / नई दिल्ली / हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की हालिया रैली के बाद हुए एक कृत्य ने देश की राजनीति में जातिगत भेदभाव और सामाजिक न्याय के मुद्दे को एक बार फिर भड़का दिया है। कांग्रेस पार्टी ने रैली स्थल पर कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ (purification) अनुष्ठान के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
घटनाक्रम के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे की रैली संपन्न होने के ठीक दो दिन बाद, ‘श्री राम सेना’ (Shri Ram Sena) नामक एक दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने उसी आयोजन स्थल पर एक ‘शुद्धिकरण हवन’ (shuddhikaran havan) किया। इस कृत्य ने एक बड़े राजनीतिक बवंडर को जन्म दे दिया है। कांग्रेस ने इस घटना को एक सोची-समझी साज़िश करार देते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर अपने ‘कट्टरपंथी तत्वों’ (fringe elements) को तैनात करने का गंभीर आरोप लगाया है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं मानसून सत्र के दौरान सदन में इस मुद्दे को उठाया और देश में बढ़ रही असहिष्णुता पर चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट तर्क है कि एक दलित नेता के रैली करने के बाद उस ज़मीन को ‘अशुद्ध’ मानकर हवन करना 21वीं सदी के भारत के लिए एक शर्मनाक कलंक है। पार्टी ने कहा है कि यह कृत्य सीधे तौर पर एक ‘दलित विरोधी मानसिकता’ (anti-Dalit mindset) का भद्दा प्रदर्शन है, जो संविधान के अनुच्छेद 15 (समानता का अधिकार) और 17 (अस्पृश्यता का अंत) की मूल भावना को गहरी ठेस पहुंचाता है।
विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है और राज्य प्रशासन से इस कृत्य में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है। यह घटना केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी याद दिलाती है कि समाज में गहरे पैठे जातिगत पूर्वाग्रह आज भी कितने मज़बूत हैं। इस मुद्दे ने आगामी राजनीतिक बहसों में दलित अधिकारों और सामाजिक समानता के नैरेटिव को एक नई धार दे दी है, जिस पर सत्ता पक्ष को जवाब देते नहीं बन रहा है।