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‘नदियों को जोड़ने से 100 साल तक नहीं होगी पानी की कमी’: गृह मंत्री ने दक्षिण भारत के लंबित जल विवादों के शीघ्र समाधान का किया आह्वान

विवेक ओझा
मामल्लापुरम

तमिलनाडु के मामल्लापुरम में आयोजित 31वीं ‘दक्षिण क्षेत्रीय परिषद’ की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारत के सबसे ज्वलंत और पुराने मुद्दे—’जल विवाद’—पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने सभी दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने लंबित जल-संबंधित मुद्दों (pending water-related issues) का जल्द से जल्द और आपसी सहमति से समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास बाधित न हो।

बैठक में कावेरी और कृष्णा नदी के जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच, गृह मंत्री ने नदियों को जोड़ने (linking major rivers) की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर देश की प्रमुख नदियों जैसे ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) को कावेरी (Cauvery) और गोदावरी (Godavari) के साथ जोड़ दिया जाए, तो यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि भारत को अगले 100 वर्षों तक पानी की कोई कमी (no water shortage) का सामना नहीं करना पड़ेगा।

जल प्रबंधन के अलावा, गृह मंत्री ने समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राज्यों के पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले बलात्कार और जघन्य अपराधों के मामलों की ‘त्वरित जांच’ (swift investigation) सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं, इसलिए फॉस्ट-ट्रैक अदालतों और पुलिस की जवाबदेही को बढ़ाना समय की मांग है।

अमित शाह का यह भाषण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि केंद्र सरकार दक्षिण भारत में विकास और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। अंतर-राज्यीय जल विवादों के कारण अक्सर राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी टकराव की स्थिति बन जाती है, जिसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ता है। गृह मंत्री द्वारा दिए गए रिवर-लिंकिंग के इस विजन को अगर ज़मीन पर उतारा जाता है, तो यह बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेलने वाले देश के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है।