केंद्र और राज्य के बीच बढ़ा कूटनीतिक टकराव: तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी के अमेरिकी दौरे को मंज़ूरी देने से केंद्र का इनकार, बीच रास्ते फंसा प्रतिनिधिमंडल

द इंडियन व्यू टीम
हैदराबाद / नई दिल्ली
भारत की संघीय राजनीति में केंद्र और गैर-बीजेपी शासित राज्यों के बीच टकराव का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Telangana CM Revanth Reddy) के प्रस्तावित संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.) के दौरे के लिए राजनीतिक मंज़ूरी (permission) देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले ने राज्य सरकार और केंद्र के बीच भारी प्रशासनिक और राजनीतिक गतिरोध पैदा कर दिया है।
इस विवाद का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि राज्य सरकार को इस नामंज़ूरी (denial of permission) की सूचना तब दी गई जब मुख्यमंत्री का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल (official delegation) अपनी यात्रा के पहले चरण के तहत यूनाइटेड किंगडम (U.K.) पहुंच चुका था। लंदन में बैठे प्रतिनिधिमंडल के लिए अगले गंतव्य (अमेरिका) की मंज़ूरी रद्द होना एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और लॉजिस्टिक शर्मिंदगी का कारण बन गया है।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के इस अमेरिकी दौरे का उद्देश्य महज़ कोई राजनीतिक यात्रा नहीं था। राज्य प्रशासन के अनुसार, इस दौरे का मुख्य लक्ष्य दुनिया के कुछ सबसे अग्रणी और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों (world’s leading educational institutions) को तेलंगाना और विशेष रूप से हैदराबाद में अपने परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित करना था। राज्य के शैक्षिक बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से तय की गई इस यात्रा का रद्द होना तेलंगाना के विकास एजेंडे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री को विदेश यात्रा पर जाने से पहले विदेश मंत्रालय (MEA) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से ‘पॉलिटिकल क्लीयरेंस’ (Political Clearance) लेना अनिवार्य होता है। केंद्र सरकार ने इस नामंज़ूरी के पीछे के कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत खुलासा नहीं किया है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस और तेलंगाना सरकार ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ और राज्य के विकास में रोड़ा अटकाने की साज़िश करार दिया है। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से आगामी दिनों में संसद से लेकर सड़क तक एक बड़े राजनीतिक बवाल का कारण बनेगा।