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महाराष्ट्र में महायुति का बड़ा फैसला: आगामी सभी चुनाव मिलकर लड़ेंगे भाजपा, शिवसेना और एनसीपी; बयानबाजी पर भी लगी रोक

Mumbai : महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार ने आगामी चुनावों को लेकर एक बहुत बड़ा और अहम फैसला लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को महायुति के नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह स्पष्ट किया कि गठबंधन के सभी घटक दल आने वाले सभी चुनाव (चाहे वह स्थानीय निकाय के हों या अन्य) पूरी एकजुटता के साथ मिलकर लड़ेंगे। इसके साथ ही गठबंधन के किसी भी दल का कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह की आलोचनात्मक या विरोधाभासी बयानबाजी नहीं करेगा।क्यों लिया गया बयानबाजी रोकने का कड़ा फैसला?हाल ही में महायुति के भीतर सहयोगी दलों के नेताओं के बीच कुछ विवाद और बयानबाजी सामने आई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। कुछ समय पहले भाजपा नेताओं की कथित ऑडियो क्लिप में अन्य नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, वहीं शिवसेना के कुछ विधायकों ने भी एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं। इन तमाम अंतर्द्वंद्वों पर विराम लगाते हुए चंद्रशेखर बावनकुले ने साफ किया कि गठबंधन के भीतर अगर कोई मतभेद या चर्चा है, तो उसे आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से किसी भी सहयोगी दल की आलोचना करना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों को किया खारिज और विकास निधि पर चर्चामहाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए बावनकुले ने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बदलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल राजनीतिक एजेंडे के तहत ऐसी बातें फैला रहे हैं, जबकि जनता ने महायुति को स्पष्ट जनादेश दिया है। बैठक के दौरान गठबंधन में शामिल करीब 12 राजनीतिक दलों के बीच बेहतर संवाद, आपसी समन्वय और विकास निधि के सही इस्तेमाल को लेकर भी विस्तार से रणनीति बनाई गई।निगमों में नियुक्तियों और अन्य अहम मुद्दों पर जोरसरकार ने आगामी एक महीने के भीतर राज्य के लगभग 170 निगमों में 650 से अधिक सदस्यों की लंबित नियुक्तियों की प्रक्रिया को पूरा करने का दावा किया है। इसके अलावा, जिला पालक मंत्रियों को विकास निधि के उपयोग के फॉर्मूले की पूरी जानकारी दे दी गई है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए धन के उचित उपयोग पर भी जोर दिया गया है। वहीं, आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों से जुड़े एक मामले में राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए बावनकुले ने कहा कि सरकार इस पर पहले ही संज्ञान ले चुकी है और बिना पूरी जानकारी के बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।