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आंध्र प्रदेश में सूखे का संकट गहराया: 7 निम्न-दबाव प्रणालियों के बावजूद राज्य में 51.2% बारिश की कमी, मवेशियों के चारे के लिए तरसे किसान

सरिता त्रिपाठी
नेल्लोर / अमरावती

दक्षिण तटीय राज्य आंध्र प्रदेश इस वर्ष एक गंभीर मौसम संकट से गुज़र रहा है। मौसम विभाग द्वारा बंगाल की खाड़ी में लगातार बन रहे सिस्टम के बावजूद राज्य को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सात निम्न-दबाव प्रणालियों (Seven low-pressure systems) के बनने के बावजूद, आंध्र प्रदेश को बहुत कम बारिश की राहत (little rain relief) नसीब हुई है।

इन मौसम प्रणालियों से केवल ‘स्थानीयकृत वर्षा’ (localised rainfall) ही हो सकी है, जिसके कारण राज्य वर्तमान में मानसून की 51.2% की भारी कमी (51.2% monsoon deficit) का सामना कर रहा है। बारिश की इस बेरुखी ने सबसे ज़्यादा चिंता राज्य के अन्नदाताओं और पशुपालकों के लिए पैदा कर दी है, जिनकी पूरी आजीविका मानसून पर निर्भर है। किसानों पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गहरी चिंताएं (concerns over the impact on farmers) व्यक्त की जा रही हैं।

ज़मीनी हकीकत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल के हफ्तों में हुई नाममात्र की बारिश (scant rainfall) के कारण किसान अपने पशुओं (livestock) के लिए चारा (fodder) खोजने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। प्रकाशम ज़िले (Prakasam district) के चिमाकुर्ती मंडल (Chimakurthy mandal) के कटामिडा वारी पालेम गांव (Katamida Vari Palem village) जैसे कई इलाकों में सूखे खेत नज़र आ रहे हैं, जहाँ मजबूर होकर किसानों को अपनी भेड़ों के झुंड को सूख चुके खेतों में चरने के लिए छोड़ना पड़ रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 51.2% की यह भारी कमी न केवल खरीफ की बुवाई को प्रभावित करेगी, बल्कि राज्य के भूजल स्तर और जलाशयों को भी सुखा देगी। यदि आने वाले हफ्तों में राज्य में व्यापक वर्षा नहीं होती है, तो प्रशासन को सूखा राहत कार्यों और मवेशियों के लिए चारा शिविर (Fodder camps) स्थापित करने के लिए आपातकालीन कदम उठाने पड़ सकते हैं।