पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत पर: मार्च से नए LPG कनेक्शनों पर लगी रोक, वैकल्पिक सिलेंडरों पर बढ़ा ज़ोर

सरिता त्रिपाठी/ नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही उथल-पुथल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचने लगा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में हाल ही में हुए ताज़ा तनाव और संघर्षों (flare-ups) के कारण भारत में नए एलपीजी (LPG) कनेक्शन अभी भी रोके (on hold) गए हैं। यह स्थिति घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता को स्पष्ट करती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस रोक के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा “भू-राजनीतिक स्थिति” (geopolitical situation) को देखते हुए यह केवल एक “अस्थायी उपाय” (temporary measure) है।

  • इस फैसले के परिणामस्वरूप, देश के कई प्रमुख शहरों—नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई—में वितरकों (Distributors) ने मध्य मार्च (mid-March) से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडरों के नए कनेक्शन जारी नहीं किए हैं।
  • चूंकि मार्च से ही कई आवेदन लंबित (applications pending) पड़े हैं, इसलिए वितरक अब उपभोक्ताओं को इसके विकल्प के रूप में 5-किलोग्राम वाले फ्री-ट्रेड सिलेंडर (5-kg free-trade cylinders) और 10-किलोग्राम वाले समग्र या कम्पोजिट सिलेंडर (10-kg composites) अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया से होने वाली आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण तेल और गैस विपणन कंपनियां अपने मौजूदा भंडार को संरक्षित करने का प्रयास कर रही हैं। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडरों पर सरकार को भारी सब्सिडी का प्रबंधन भी करना पड़ता है। ऐसे में ‘अस्थायी उपाय’ के रूप में छोटे और गैर-सब्सिडी वाले विकल्पों की ओर धकेलना आपूर्ति श्रृंखला को प्रबंधित करने की एक रणनीति है। हालांकि, लंबे समय तक यह रोक आम नागरिकों, विशेषकर नए घरों में शिफ्ट होने वाले लोगों के लिए एक बड़ी असुविधा का कारण बन रही है।