Trending

पीएम मोदी का बड़ा विदेशी दौरा: उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा शुरू, एससीओ समिट में इन अहम मुद्दों पर होगी बड़ी चर्चा

New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर शनिवार को ताशकंद के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां वे उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के विशेष निमंत्रण पर पहुंचे हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा और अहम खनिजों जैसे तमाम प्रमुख क्षेत्रों को लेकर द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी आगामी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयां देने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।रणनीतिक साझेदारी और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के रास्तों पर मंथन होगा। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को भी नए सिरे से रेखांकित करने का एक शानदार अवसर साबित होगी। यात्रा के दौरान दोनों नेता ‘विकसित भारत 2047’ और ‘उज्बेकिस्तान-2030’ के साझा विकास लक्ष्यों को गति देने के एजेंडे पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक, पीएम मोदी ताशकंद में स्थित शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थापित महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं।व्यापार, रक्षा और अहम खनिजों पर रहेगा खास फोकस उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत ने प्रधानमंत्री के इस दौरे पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार और निवेश के मोर्चे पर अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। दोनों देशों के बीच व्यापार में 300 प्रतिशत और निवेश में 700 प्रतिशत से अधिक की शानदार बढ़ोतरी हुई है। उज्बेकिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, ऐसे में भारत को अपनी औद्योगिक जरूरतों के लिए अहम खनिजों की आवश्यकता है, जिसको लेकर दोनों पक्ष दीर्घकालिक सप्लाई व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल, स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, कृषि, फिनटेक और कनेक्टिविटी से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष चर्चा की जाएगी, ताकि दोनों देशों के व्यापारी वर्ग को और अधिक लाभ मिल सके।चौथा उज्बेकिस्तान दौरा और ऐतिहासिक संबंध विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है। इससे पहले उन्होंने साल 2015 में द्विपक्षीय यात्रा की थी, जिसके बाद 2016 और 2022 में एससीओ समिट के सिलसिले में वे वहां गए थे। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच पिछले कई वर्षों से लगातार उच्चस्तरीय संपर्क बने हुए हैं, जिसकी मिसाल 2018 में उज्बेकि राष्ट्रपति की भारत यात्रा और 2019 के वाइब्रेंट गुजरात समिट में उनकी सहभागिता से मिलती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की पिछली मुलाकातें साल 2023 में दुबई में आयोजित सीओपी28, 2024 में कजान ब्रिक्स समिट और 2025 में चीन के तियानजिन में संपन्न एससीओ समिट के दौरान हो चुकी हैं, जो दोनों नेताओं के बीच बेहतरीन तालमेल को दर्शाती हैं।बिश्केक में एससीओ समिट और किर्गिस्तान यात्रा का कार्यक्रम उज्बेकिस्तान का दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां वे एससीओ के 26वें शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इस वर्ष शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसके तहत इस बार के सम्मेलन की थीम ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’ रखी गई है। बिश्केक में आयोजित होने वाले इस बड़े वैश्विक कार्यक्रम में 31 अगस्त को एक भव्य स्वागत डिनर का आयोजन किया जाएगा, जिसके अगले दिन मुख्य शिखर बैठक संपन्न होगी। इस मुख्य बैठक में प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक मंच से अपना संबोधन देंगे और समिट के इतर कई अन्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।