मध्य प्रदेश: गर्भवती महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य महकमे की बड़ी कार्रवाई, दो डॉक्टर निलंबित

द इंडियन व्यू टीम
भोपाल
सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में घोर लापरवाही और कुप्रबंधन के मामले अक्सर ग्रामीण और ज़िला स्तर के सरकारी अस्पतालों में जानलेवा साबित होते हैं। मध्य प्रदेश में मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल (Maternal Healthcare) की चरमराती स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। मध्य प्रदेश के एक सरकारी अस्पताल में एक गर्भवती महिला की दर्दनाक मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए दो डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी और प्रारंभिक जांच (preliminary inquiry) के आधार पर की गई है।
प्राप्त जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड्स से मृतका की अत्यंत गंभीर चिकित्सीय स्थिति का खुलासा हुआ है, जो स्पष्ट रूप से एक मेडिकल इमरजेंसी की ओर इशारा कर रही थी, जिसे नज़रअंदाज़ किया गया। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, मृतका कल्पना मिश्रा का प्लेटलेट काउंट लगभग 30,000 प्रति माइक्रोलीटर था (जो कि सामान्य से बहुत कम है), और इसके साथ ही उन्हें गंभीर रूप से उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए लीवर एंजाइम की समस्या भी थी।
चिकित्सा विज्ञान के जानकारों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान प्लेटलेट्स का इतना कम होना, अत्यधिक उच्च रक्तचाप (severe hypertension) और बढ़े हुए लीवर एंजाइम का एक साथ होना ‘हेल्प सिंड्रोम’ (HELLP syndrome) या गंभीर ‘प्रीएक्लेम्पसिया’ (Preeclampsia) का एक बिल्कुल स्पष्ट और प्राणघातक लक्षण है। ऐसी नाज़ुक स्थिति में गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे दोनों की जान को भारी खतरा होता है, और मरीज़ को तत्काल उच्च-स्तरीय गहन चिकित्सा (ICU), रक्त आधान और विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञों की 24 घंटे निगरानी की आवश्यकता होती है।
इन बिल्कुल स्पष्ट लाल झंडियों (Red flags) और मेडिकल रिपोर्ट्स के बावजूद, सरकारी अस्पताल में महिला को सही समय पर जीवनरक्षक उपचार या बड़े अस्पताल में सुरक्षित रेफरल नहीं मिल पाना राज्य की चिकित्सा व्यवस्था की एक बहुत बड़ी और शर्मनाक नाकामी है। दो डॉक्टरों का यह निलंबन भले ही त्वरित प्रशासनिक जवाबदेही को दर्शाता है, लेकिन यह घटना प्रदेश की पूरी मातृ मृत्यु दर (MMR) और आपातकालीन प्रसूति देखभाल सुविधाओं के खोखलेपन को निर्दयता से उजागर करती है। राज्य प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय पर अब इस बात का भारी दबाव है कि वह इस मामले की एक विस्तृत, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे ताकि दोषियों को सज़ा मिले और भविष्य में ऐसी रोकी जा सकने वाली मौतों को टाला जा सके।