नेपाल में जल प्रलय का तांडव: मरने वालों का आंकड़ा 579 तक पहुंचा, 320 भारतीयों सहित 2000 लोग अभी भी लापता

राघवेन्द्र प्रताप सिंह
काठमांडू / नई दिल्ली
पड़ोसी मुल्क नेपाल इस समय अपने इतिहास की सबसे भयावह और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) और भूस्खलन ने पूरे देश को गहरे संकट में धकेल दिया है। 28 अगस्त, 2026 के ताज़ा और खौफनाक अपडेट के अनुसार, इस जल प्रलय में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है। यह आंकड़ा हर बीतते घंटे के साथ डरावनी गति से बढ़ रहा है। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि करीब 2,000 लोग अभी भी लापता (Missing) बताए जा रहे हैं, जिनके जीवित बचने की उम्मीदें समय के साथ धुंधली पड़ती जा रही हैं।
इस पूरी त्रासदी में मानवीय संकट के साथ-साथ एक बहुत बड़ा कूटनीतिक और क्षेत्रीय संकट भी उभर कर सामने आया है। भारी तबाही के बाद, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को लेकर बेहद चिंतित है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस प्रलयकारी बाढ़ में कम से कम 320 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। इसके अतिरिक्त, करीब 400 अन्य भारतीय नागरिक चीनी सीमा (Chinese side) के पास के दुर्गम इलाकों में फंसे हुए हैं, जहां तक बचाव दलों की पहुंच लगभग नामुमकिन हो रही है। इनमें से 98 भारतीय पर्यटकों का तो अभी तक कोई सुराग ही नहीं मिल पाया है।
इस भीषण आपदा के बीच बड़े पैमाने पर बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। नेपाली सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें 85 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बचाव कार्यों की भयावहता का अंदाज़ा नुवाकोट जिले के देवीघाट से आई ड्रोन तस्वीरों (Drone view) से लगाया जा सकता है। इन तस्वीरों में टूटे हुए पुल, जमींदोज़ हो चुके मकान और मलबे में तब्दील हो चुके पूरे के पूरे गांव साफ नज़र आ रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता और भारी अंतरराष्ट्रीय व कूटनीतिक दबाव (intense diplomatic pressure) के बाद, नेपाल सरकार ने आखिरकार विदेशी विशेषज्ञों को खोज और बचाव अभियानों (search operation) में शामिल होने की अनुमति दे दी है। भारत ने भी अपने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमों और भारी राहत सामग्री को नेपाल के प्रभावित इलाकों में उतार दिया है।
नेपाली सेना के डॉक्टर और मेडिकल टीमें अस्थायी फील्ड अस्पतालों में दिन-रात घायलों का इलाज कर रही हैं। नुवाकोट के बट्टार (Battar) में बनाए गए ऐसे ही एक फील्ड अस्पताल में भोटेकोशी नदी (Bhotekoshi flood) की विनाशकारी बाढ़ से बचाए गए सैकड़ों लोगों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। पहाड़ों से मलबा खिसकने के कारण मुख्य राजमार्ग और संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट चुके हैं, जिसके कारण भारी मशीनरी को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है और नेपाल सरकार के साथ हर स्तर पर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।