एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर सुप्रिया सुले का दो टूक बयान: ‘राष्ट्रवादी एक ही है, मनमर्जी नहीं बल्कि संविधान से चलेगा सब कुछ’

Mumbai : महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के बीच विलय और पुनर्मिलन की चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने पार्टी का स्पष्ट पक्ष सबके सामने रखा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मूल रूप से एक ही है और पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष व संस्थापक सदस्य के रूप में शरद पवार के साथ घोर अन्याय हुआ है। पार्टी के नाम, सिंबल और कानूनी अधिकारों को लेकर छिड़ी यह बड़ी कानूनी लड़ाई इस समय देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जिस पर उन्हें जल्द ही सुनवाई की अगली तारीख मिलने की पूरी उम्मीद है।शरद पवार से गलत तरीके से छीनी गई पार्टीबारामती से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने यह भी साफ किया कि वह यह कानूनी लड़ाई सिर्फ अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए नहीं लड़ रही हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी है कि भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल या नेता के साथ इस तरह का अन्याय न हो। उन्होंने एक सीधा उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति किसी के घर में घुसकर गलत और फर्जी दस्तावेज दिखाकर अपना मालिकाना हक जताने लगे, तो क्या असली मालिक उस अन्याय को चुपचाप स्वीकार कर लेगा? ठीक इसी प्रकार, पार्टी के स्वामित्व का फैसला भी किसी की व्यक्तिगत मर्जी से नहीं बल्कि देश के कानून और संविधान के दायरे में होना चाहिए।विधायक-सांसद नहीं, पार्टी का संविधान और संगठन है अहमपार्टी के भीतर चल रही टूट और दावों पर बात करते हुए सुले ने दावा किया कि एनसीपी के मूल संविधान के मुताबिक केवल यह देख कर पार्टी पर हक तय नहीं किया जा सकता कि किस गुट के पास कितने निर्वाचित विधायक या सांसद मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के जिलाध्यक्ष, जमीनी कार्यकर्ता और आधिकारिक संगठनात्मक दस्तावेज सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। भले ही कुछ समय के लिए अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधि दूसरी तरफ चले गए हों, लेकिन कानूनी दस्तावेजों और पार्टी संविधान के आधार पर एनसीपी कल भी शरद पवार की थी, आज भी उन्हीं की है और आगे भी कानूनी संघर्ष के जरिए उन्हीं के पास रहेगी।पार्टी मिलने के बाद भविष्य का निर्णय करेंगे शरद पवारसुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि उनकी और पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग सिर्फ इतनी है कि न्याय और अधिकारों के सिद्धांत पर मूल पार्टी शरद पवार को वापस सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानूनी लड़ाई के बाद पार्टी पूरी तरह से शरद पवार को वापस मिल जाती है, तो उसके बाद संगठन का भविष्य क्या होगा, इसका अंतिम निर्णय खुद शरद पवार ही लेंगे। पार्टी की कमान किसे सौंपी जानी चाहिए या उसका नेतृत्व किसके हाथों में रहेगा, यह पूरी तरह से उनका अपना अधिकार होगा, क्योंकि देश किसी की मनमर्जी से नहीं बल्कि केवल संविधान के नियमों के अनुसार चलता है।