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आर्थिक अपराधों पर सीबीआई का बड़ा प्रहार: 17.22 करोड़ रुपये के चिट फंड घोटाले में फरार मुख्य आरोपी गिरफ्तार

सरिता त्रिपाठी
नई दिल्ली

भारत में मासूम निवेशकों को रातों-रात अमीर बनाने का लालच देकर उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई लूटने वाले चिट फंड घोटालों (Chit Fund Scams) का एक लंबा और काला इतिहास रहा है। आर्थिक अपराधों के खिलाफ अपनी ज़ीरो-टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करते हुए, देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सीबीआई ने एक बहुचर्चित चिट फंड मामले (chit fund case) में लंबे समय से फरार चल रहे एक मुख्य आरोपी (absconding accused) को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी सफेदपोश अपराधियों (white-collar criminals) के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं।

इस पूरे घोटाले की कार्यप्रणाली अन्य पोंजी स्कीमों (Ponzi Schemes) की तरह ही बेहद शातिराना थी। सीबीआई की विस्तृत जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी और उसकी कंपनी ने आकर्षक रिटर्न और दोगुने मुनाफे का झांसा देकर “भोले-भाले जमाकर्ताओं” (gullible depositors) से अवैध रूप से भारी मात्रा में धन (funds were illegally collected) एकत्र किया था। इन निवेशकों में ज़्यादातर निम्न-मध्यम वर्ग के दिहाड़ी मज़दूर, छोटे किसान, और पेंशनभोगी शामिल थे, जिन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा या बुढ़ापे के सहारे के लिए अपनी जीवन भर की बचत इस फर्जी कंपनी में लगा दी थी।

जांच के दौरान जब कंपनी के कामकाज में भारी अनियमितताएं और धोखाधड़ी सामने आई, तो सीबीआई ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया। एजेंसी ने इस आर्थिक अपराध की गंभीरता को देखते हुए पूर्ववर्ती ‘भारतीय दंड संहिता’ (erstwhile Indian Penal Code) और बेहद सख्त ‘प्राइज़ चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट’ (Prize Chits and Money Circulation Schemes Banning Act) के प्रावधानों (provisions) को लागू (invoked) किया। यह कानून विशेष रूप से ऐसी पोंजी स्कीमों और पिरामिड योजनाओं पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है, जो बिना किसी वैध व्यापारिक मॉडल के केवल नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को रिटर्न का लालच देती हैं।

आरोपी इस भारी भरकम घोटाले को अंजाम देने के बाद से ही जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक कर अंडरग्राउंड हो गया था। पुलिस और सीबीआई के लगातार समन को नज़रअंदाज़ करने के बाद, अंततः एक विशेष अदालत द्वारा इस आरोपी के खिलाफ 5 अगस्त, 2024 को एक ‘गैर-जमानती वारंट’ (non-bailable warrant) जारी किया गया था। इस वारंट के जारी होने के बाद से ही सीबीआई की विशेष टीमें आरोपी की तलाश में कई राज्यों में छापेमारी कर रही थीं।

वित्तीय अनियमितता के आंकड़ों के अनुसार, इस गिरफ्तार आरोपी ने कथित तौर पर आम जनता के ₹17.22 करोड़ (₹17.22 crore) की भारी-भरकम राशि का गबन (misappropriated funds) किया है। इतनी बड़ी राशि के साथ फरार (absconding) होने के बाद वह देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहचान और ठिकाने बदलकर रह रहा था।

सीबीआई द्वारा की गई यह गिरफ्तारी उन हज़ारों निवेशकों के लिए न्याय की एक किरण लेकर आई है, जो अपना पैसा डूब जाने के कारण भारी मानसिक और आर्थिक अवसाद से गुज़र रहे थे। अब जांच एजेंसी आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने 17.22 करोड़ रुपये की यह भारी-भरकम राशि कहां निवेश की है या किन बेनामी संपत्तियों में छिपाई है। सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी अब इस दिशा में काम करेंगे कि आरोपी की संपत्तियों को कुर्क करके निवेशकों का पैसा उन्हें वापस लौटाया जा सके। यह मामला एक बार फिर आम जनता को आगाह करता है कि बाज़ार से कई गुना ज़्यादा रिटर्न का दावा करने वाली किसी भी असत्यापित योजना में निवेश करने से बचना चाहिए।